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Khargone News: मान्यता है कि इस नृत्य की शुरुआत स्वयं भगवान भोलेनाथ ने की थी. हर साल देव उठनी एकादशी से लेकर महाशिवरात्रि तक भगत गांवों में जाकर निमाड़ी गीत गाते हैं और भगवान शिव की महिमा का बखान करते हैं. जानें परंपरा…
Khargone News: मध्य प्रदेश के निमाड़ अंचल में इन दिनों भक्ति का अलग ही रंग देखने को मिल रहा है. लाल-पीली चटक वेशभूषा पहने कुछ लोग, सजी-धजी काठी माता को लेकर गांव-गांव घूम रहे हैं. ढोलक और थाली की थाप सहित पारंपरिक गीतों पर अनोखा नृत्य करते हुए घर-घर दस्तक दे रहे है. लेकिन, आपको बता दें कि, यह कोई साधारण नृत्य नहीं, बल्कि निमाड़ की पुरानी और अनोखी लोक कला “काठी नृत्य” है, जो भगवान शिव और माता गौरा की भक्ति से जुड़ी हुई है.
मान्यता है कि इस नृत्य की शुरुआत स्वयं भगवान भोलेनाथ ने की थी. हर साल देव उठनी एकादशी से लेकर महाशिवरात्रि तक भगत गांवों में जाकर निमाड़ी गीत गाते हैं और भगवान शिव की महिमा का बखान करते हैं. महिलाएं श्रद्धा से काठी माता की पूजा करती हैं और भगतों को दान स्वरूप अनाज और धन भेंट करती हैं. खरगोन की यह प्राचीन लोक कला, विलुप्त होने लगी है. पहले बड़ी संख्या में भगत लोग इस लोक कला से जुड़े थे, पर समय के साथ इनकी संख्या घटते चले गई.
52 साल से निभा रहे परंपरा
आज जिले में कुछ ही लोग बचे है. इनमें गोगावा के राजाराम सिटोले पिछले 52 सालों से इस नृत्य से जुड़े हैं. धरगांव के मन्नालाल सिटोले 17 साल से इस परंपरा को निभा रहे हैं, जबकि कसरावद के दीपक खेड़े 31 वर्षों से इस कला को जीवित रखने का काम कर रहे हैं. इनका कहना है कि काठी नृत्य सिर्फ नाच-गाना नहीं, बल्कि भगवान शिव और माता गौरा की भक्ति का तरीका है, जो हमें पूर्वजों से विरासत में मिला है.
क्या है काठी माता और नृत्य?
बताते हैं कि काठी नृत्य में बांस से बनी लकड़ी की “काठी माता” को सोलह श्रृंगार से सजाकर गौरा माता का रूप दिया जाता है. इस लोक कला में दो भगत, एक डुगडुगी बजाने वाला और एक काठी माता लेकर चलने वाला होता है. मुख्य भगत लाल रंग की पोशाक पहनते हैं, सिर पर कलगी और कंधे पर मृगशाला (हिरण की खाल) धारण करते हैं, जो शिव का प्रतीक माना जाता है.
भक्ति और संस्कृति की अनोखी परंपरा
देवउठनी एकादशी से कठी माता उठाई जाती है. हर दिन की शुरुआत गणेश वंदना से होती है और फिर शिव के गीत गाए जाते हैं. भगत नाचते हुए लोगों को भक्ति और संस्कृति से जोड़ते हैं. चार महीने बाद महाशिवरात्रि के दिन पंचमढ़ी से करीब 15 किलोमीटर दूर देवड़ा नदी में काठी माता का श्रृंगार विसर्जित किया जाता है. इसके बाद भगत बड़ा महादेव मंदिर में जाकर पूजा करते हैं.
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें