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आईसीसी महिला वनडे विश्व कप में ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा का टीम इंडिया को चैंपियन बनाने में सबसे बड़ा योगदान रहा. दीप्ति ने भारतीय टीम के लिए साउथ अफ्रीका के खिलाफ फाइनल में अर्धशतक लगाने के अलावा 5 विकेट भी लिए. दीप्ति की इस उपलब्धि पर उनके भाई ने कहा कि मेरी बहन ने अपना वादा पूरा किया.
नई दिल्ली: भारत में क्रिकेटर को किसी सेलीब्रेटी से कम नहीं माना जाता हैं, लेकिन हर किसी को इस खेल में लाइमलाइट मिले ये जरूरी नहीं. कई ऐसे प्रतिभावान खिलाड़ी होते हैं जो गुमनामी के अंधेरे में खो जाते हैं, लेकिन कड़ी मेहन और लगन कभी ना कभी सफलता जरूर दिलाती है. ऐसी ही कहानी भारतीय महिला टीम की स्टार ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा की है. दीप्ति ने हाल ही में आईसीसी वनडे महिला विश्व कप में टीम इंडिया को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई.
दीप्ति ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ फाइनल में बल्लेबाजी में फिफ्टी लगाने के बाद गेंदबाजी में 5 विकेट भी लिए. महिला वनडे विश्व कप के फाइनल में ऐसा करने वाली दीप्ति दुनिया की पहली खिलाड़ी भी बनी. हालांकि, दीप्ति को यहां तक पहुंचने के लिए काफी संघर्ष भी करना पड़ा. दीप्ति ही नहीं, उनके पूरे परिवार ने उन्हें क्रिकेटर बनाने के लिए दुख तकलीफ सही. खास तौर से उनके बड़े सुमित ने. बहन के विश्व चैंपियन बनने पर अब दीप्ति के भाई को उनकी मेहनत का फल मिल गया. वे अपनी बहन की उपलब्धि पर बहुत खुश हैं.
दीप्ति के लिए भाई ने छोड़ी थी नौकरी
इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में दीप्ति के भाई ने कहा, “मैंने दीप्ति के लिए जब अपनी नौकरी छोड़ने का फैसला किया तो मुझे नहीं पता था कि वह इंडिया के लिए खेल पाएगी या फिर नहीं. क्या वह कभी विश्व कप में खेल पाएगी ये तो मैंने सोचा भी नहीं था. मैं बस एक ही चीज जानता था कि मेरे हाथ में जो कुछ है मैं करूंगा और वो एक दिन भारत के लिए खेलेगी.”
उन्होंने कहा, “जब आप पूरी शिद्दत और पूरे मन से किसी काम करते हैं तो फिर वो चीजें जरूर पूरी होती है.” दीप्ति के लिए यह उनका दूसरा महिला विश्व कप फाइनल था. 2017 में दीप्ति 20 साल की उम्र में भारत के लिए विश्व कप खेलने मैदान पर उतरी थीं. इस विश्व कप में टीम इंडिया को फाइनल में 9 रन से हार का सामना करना पड़ा था.
भाई के त्याग को नहीं भूली हैं दीप्ति शर्मा
दीप्ति शर्मा भी अपनी भाई के त्याग को नहीं भूली हैं. दीप्ति के भाई ने कहा, “फाइनल से पहले दीप्ति ने मुझसे वादा किया था कि भैया जो कुछ भी हो मैं अपना 100 प्रतिशत दूंगी मैदान पर. मैं इस बार ट्रॉफी को नहीं जाने दूंगी. जब मैच खत्म हुआ और वह चैंपियन बनी थी तो फिर मुझे उसने ये बातें याद दिलाई और कहा कि भैया मैंने अपना वादा पूरा किया.”
दीप्ति ने भी फाइनल के बाद आईसीसी के साथ बातचीत में अपने भाई के लिए कहा था कि, “मैंने अपने भाई की वजह से क्रिकेट खेलना शुरू किया. उन्होंने मेरे लिए बहुत त्याग किया है. उन्हें अपनी नौकरी तक छोड़नी पड़ी, ताकि मैं अपने सपने पूरे कर सकूं. ऐसे मंच पर परिवार के सामने अच्छा प्रदर्शन करना और ट्रॉफी उठाना वाकई खास लगता है.”
अक्टूबर 2025 से नेटवर्क 18 समूह में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत. पत्रकारिता में 9 साल का अनुभव. एबीपी न्यूज डिजिटल में स्पोर्ट्स बीट से करियर की शुरुआत। इंडिया टीवी और नवभारत टाइम्स ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित संस्…और पढ़ें
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