धार में मां सरस्वती मंदिर भोजशाला की मुक्ति और उनके गौरव की पुनर्स्थापना के संकल्प के साथ हिंदू समाज और भोज उत्सव समिति ने एक वृहद बैठक आयोजित की। बसंत पंचमी 23 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी, जिसके मद्देनज़र यह बैठक स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर में संपन्न ह
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बैठक में भोज उत्सव समिति के अध्यक्ष सुरेश जलोदिया, महामंत्री सुमित चौधरी, वरिष्ठ मार्गदर्शक अशोक जैन, कार्यसमिति सदस्य राजेश शुक्ला सहित नगर के प्रमुख व्यापारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, धार्मिक, राजनीतिक व्यक्तित्व, युवा और मातृशक्ति बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
अध्यक्ष बोले- भोजशाला मुक्ति पूरे हिंदू समाज की भावनाओं का आंदोलन सुरेश जलोदिया ने कहा कि भोजशाला मुक्ति आंदोलन केवल समिति का नहीं, बल्कि मां वाग्देवी के भक्तों और सकल हिंदू समाज की आस्था का प्रतीक है।उन्होंने कहा कि—“संपूर्ण हिंदू समाज की सामूहिक आस्था ही भोजशाला की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करेगी।
सालभर के कार्यक्रमों और आर्थिक विवरण का प्रस्तुतिकरण समिति के कोषाध्यक्ष प्रवीण गोधा ने वर्षभर के आय-व्यय का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। महामंत्री सुमित चौधरी ने पिछले वर्ष समिति द्वारा किए गए कार्यों एवं भोजशाला मुक्ति से जुड़े कार्यक्रमों का प्रतिवेदन पढ़ा। आगामी बसंत पंचमी के आयोजन को लेकर समाजजनों से सुझाव भी आमंत्रित किए गए।
वसंत उत्सव की घोषणा व नई कार्यकारिणी का गठन बैठक में प्राप्त सुझावों पर चर्चा के बाद 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को आयोजित होने वाले वसंत उत्सव के कार्यक्रमों की घोषणा की गई।कार्यसमिति सदस्य राजेश शुक्ला ने भोज उत्सव समिति की 2026–27 की नई कार्यकारिणी की घोषणा की और पदाधिकारियों के दायित्वों पर प्रकाश डाला।
इस वर्ष बसंतोत्सव के सभी कार्यक्रमों के संचालन हेतु हेमन्त दौराया को महाप्रबंधक का दायित्व सौंपा गया।
पूरे दिन अखंड पूजा, खंडित नहीं होगी परंपरा समिति के वरिष्ठ संरक्षक अशोक जैन ने बताया कि इस बार बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ने से उत्सव विशेष होगा। उन्होंने कहा केंद्रीय पुरातत्व विभाग के 07 अप्रैल 2003 के आदेश के अनुसार पूरे दिन अखंड पूजा करने का मानस बनाया गया है। किसी भी स्थिति में मां सरस्वती की पूजा को खंडित नहीं होने दिया जाएगा। यह हिंदू समाज की आस्था और सम्मान का विषय है।
उन्होंने यह भी कहा कि हाई कोर्ट के आदेश से 98 दिन तक भोजशाला में सर्वे कार्य हुआ, और टाइटल से जुड़े प्रकरण माननीय सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। इस बार भी पूजा निर्बाध रूप से होगी।
सत्याग्रह जारी रहेगा, जनप्रतिनिधियों को भी दी जाएगी चेतावनी समिति ने समाज से हर मंगलवार होने वाले नियमित सत्याग्रह में शामिल होने का आव्हान किया। साथ ही यह भी कहा कि विधायक, सांसद और प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन देकर आगाह किया जाएगा कि धार के हिंदू समाज की भावनाओं को किसी भी प्रकार आहत न होने दिया जाए।