धार में 30 दुकानें बनकर तैयार, पर लटके हैं ताले: भोज उद्यान में शिल्पकारों के लिए बना हाट बाजार वीरान; 3 करोड़ के प्रोजेक्ट का हिस्सा – Dhar News

धार में 30 दुकानें बनकर तैयार, पर लटके हैं ताले:  भोज उद्यान में शिल्पकारों के लिए बना हाट बाजार वीरान; 3 करोड़ के प्रोजेक्ट का हिस्सा – Dhar News



धार जिले के भोज उद्यान में शिल्पकारों और कलाकारों को बेहतर मंच व रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया हाट बाजार वीरान पड़ा है। यहां 30 से अधिक दुकानें तैयार की गईं, लेकिन काम पूरा होने के बावजूद इन पर आज तक ताले लटके हैं। यह दुकानें स्थानीय क

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जानकारी के अनुसार, कुछ वर्ष पहले करीब तीन करोड़ की लागत से भोज उद्यान को विकसित करने के साथ ही इसके भीतर 30 से अधिक पक्की दुकानें तैयार की गई थीं। आदिवासी बहुल धार जिले में इस हाट बाजार को ग्रामीण हाट बाजार की तर्ज पर विकसित करने का प्रचार-प्रसार किया गया था। दुकानों के आसपास आकर्षक पेंटिंग भी की गई थी।

सरकारी आयोजन हो रहे, बाजार वीरान परियोजना पूरी हो चुकी है, लेकिन इसका मूल उद्देश्य लंबे समय से अधूरा है। उद्यान में अन्य सरकारी आयोजन तो हो रहे हैं, किंतु हाट बाजार वाला हिस्सा वीरान पड़ा है और दुकानों पर ताले लगे हुए हैं। स्थानीय निकाय यानी नगर पालिका ने बाद में हाट बाजार को वास्तविक रूप से बसाने पर ध्यान नहीं दिया।

पार्षद बोलीं- महिलाओं को आवंटित की जाएं दुकानें कांग्रेस की ओर से पार्षद सारिका अजय ठाकुर ने बताया कि हाट बाजार के नाम से जो प्रोजेक्ट तैयार किया, वह बेकार साबित हो रहा है। उन्होंने कहा, “जब वहां कुछ करना ही नहीं था तो उस पर इतना बजट खर्च क्यों किया। हमने प्रस्ताव दिया था कि यहां सांसद विधायक व नगर पालिका अध्यक्ष भी महिला हैं। तो हाट बाजार की दुकानें भी महिलाओं को आवंटित की जाएं. लेकिन उस पर आज तक क्रियान्वयन नहीं किया।”

नेता प्रतिपक्ष बोले- परिषद की मांग पर भी ध्यान नहीं नगर पालिका नेता प्रतिपक्ष अब्दुल करीम ने बताया कि नगर पालिका ने दुकानों को पहले एनजीओ के माध्यम से संचालित करने की बात कही, लेकिन आगे कुछ नहीं भी उठाया किया। उन्होंने कहा, “हमने भी परिषद में इसे शुरू करने की मांग की थी, जिस पर भी अब तक ध्यान नहीं दिया।”

सीएमओ बोले- स्व-सहायता समूहों के लिए प्रस्ताव बनाया है इस मामले में सीएमओ नपा धार, कुंवर विश्वनाथ सिंह का कहना है, “हमने इसके लिए प्रस्ताव बनाया है, जिसमें महिला स्व सहायता समूह के माध्यम से यहां कैंटीन संचालित की योजना है। इसके अलावा स्वदेशी आत्मनिर्भर अभियान के तहत यहां स्वदेशी वस्तुओं के दुकान उपलब्ध कराई जाएं। आगे ये प्रस्ताव परिषद में रखेंगे, उसी के आधार पर आगे क्रियान्वयन किया जाएगा।”



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