पहाड़ी पर आज भी रहता है कालिया नाग! अंधा हो गया था सपेरा, रोचक कहानी

पहाड़ी पर आज भी रहता है कालिया नाग! अंधा हो गया था सपेरा, रोचक कहानी


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Chhatarpur News: पुजारी ने बताया कि हमनें अपने बुजुर्गों से सुना है कि कालिया नाग की पहाड़ी के पास मैदान में एक कुम्हार ने ईंट का भट्टा लगाया था. कालिया नाग की फुफकार से यह भट्ठा पक गया था. तभी से यह स्थान मशहूर हो गया. इसके बाद उस कुम्हार को सपना आया था कि यहां से अपना डेरा हटा लो, नहीं तो परेशानी हो जाएगी.

छतरपुर. मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के गौरिहार तहसील के अंतर्गत आने वाले गहबरा गांव में एक ऐसा पहाड़ है, जिसको लेकर किंवदंती है कि इस स्थान पर आज भी कालिया नाग वास करता है. बुजुर्गों के मुताबिक, यहां कालिया नाग का मंदिर भी था. यहां पूजा भी होती थी. साथ ही बच्चों का मुंडन भी होता था. ग्रामीणों ने लोकल 18 को बताया कि पहाड़ी के ऊपर एक स्थान है, जहां कालिया नाग वास करता है. बरसात के बाद जंगल बढ़ जाने के कारण वहां तक पहुंचना मुश्किल हो रहा था. मंदिर जाने के लिए तो रास्ता था लेकिन कालिया नाग के स्थान पर जाना काफी मुश्किल था. घना जंगल और जंगली जानवर होने से वहां तक जा पाना संभव नहीं था, फिर भी दूर से ही हमने इस स्थान को देखने की कोशिश की.

स्थानीय निवासी ब्रह्मानंद लोकल 18 को बताते हैं कि इस स्थान के बारे में हम बुजुर्गों से सुनते आए हैं कि यह विशाल कालिया नाग का स्थान है. हालांकि हमने तो नहीं देखा है क्योंकि जब से समझने लगे कि यहां कालिया नाग का स्थान है, तो जाना छोड़ दिया. यहां पहले पूजा भी होती थी. बच्चों का मुंडन भी होता था. हालांकि आज भी कुछ परिवार के लोग मुंडन कराने जाते हैं. यहां तक जाने के लिए रास्ता भी है. पहाड़ की दूसरी तरफ से सीधा रास्ता है, चढ़ना भी नहीं पड़ता है. अभी जंगल ज्यादा बढ़ गया है, इसलिए लोग जाने से बचते हैं क्योंकि यहां जहरीले और जंगली जीव भी रहते हैं.

अंधा हो गया था सपेरा
ब्रह्मानंद आगे बताते हैं कि जब उस स्थान पर एक बाबा रहते थे, तो कालिया नाग को पकड़ने के लिए एक सपेरे को बुलाया गया था लेकिन जैसे ही वह सपेरा पहुंचा, तो वह अचानक अंधा हो गया. इसके बाद सपेरे ने विनती की. बुजुर्ग बताते थे कि इसके बाद उसे दिखाई देने लगा.

पहाड़ पर कईं गुफाएं
वहीं 74 वर्षीय पुजारी रामफल शुक्ला लोकल 18 को बताते हैं कि कालिया नाग के स्थान पर गांव के ही एक बुजुर्ग पुत्तू बाबा रहते थे. वह दशहरा पर वहां पान भी रखने जाते थे और दीपावली में दीया भी रखते थे. नाग पंचमी के दिन पूजा होती थी. हालांकि अब वहां कोई नहीं जाता. कालिया नाग के इस स्थान पर ग्रेनाइट की बड़ी-बड़ी गुफाएं आज भी हैं. इन गुफाओं में एक साथ 500 लोग बैठ सकते हैं. वहां बड़ा मैदान और तालाब भी था.

नाग की फुफकार से पक गया ईंट भट्टा
पुजारी बताते हैं कि हमनें अपने बुजुर्गों से सुना है कि कालिया नाग की पहाड़ी के पास मैदान में एक बार एक कुम्हार ने ईंट भट्टा लगाया था. यह भट्टा कालिया नाग की फुफकार से पक गया था. तभी से यह स्थान प्रसिद्ध हो गया. इसके बाद उस कुम्हार को सपना भी आया था कि यहां से अपना डेरा हटा लो, नहीं तो दिक्कत हो जाएगी. जिसके बाद यहां से कुम्हार ने अपना डेरा हटा लिया था.

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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