डीएवीवी ने तीन विषय के अंक नहीं जोड़े: लॉ स्टूडेंट सिविल जज की मुख्य परीक्षा से बाहर, विवि ने हाईकोर्ट के निर्देश भी नहीं माने – Indore News

डीएवीवी ने तीन विषय के अंक नहीं जोड़े:  लॉ स्टूडेंट सिविल जज की मुख्य परीक्षा से बाहर, विवि ने हाईकोर्ट के निर्देश भी नहीं माने – Indore News



देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। इंदौर में बीए-एलएलबी की छात्रा प्राची अग्रवाल के तीन विषयों के अंक अंतिम परिणाम में शामिल नहीं किए गए, जिससे उसका कुल प्रतिशत 70% के न्यूनतम मानदंड से कम रह गया। इस कारण वह सिविल जज (

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मामला खातेगांव निवासी प्राची अग्रवाल का है, जो वर्ष 2018 में बीए-एलएलबी की पढ़ाई करने इंदौर आई थी। उसने प्रथम वर्ष राजस्थान की वनस्थली विद्यापीठ से उत्तीर्ण किया था और शेष पाठ्यक्रम डीएवीवी से पूरा किया, लेकिन विश्वविद्यालय ने वनस्थली में उत्तीर्ण किए गए तीन विषयों (अपकृत्य कानून और अनुबंध कानून के दो पेपर) के अंक मार्कशीट में जोड़ने में चूक कर दी।

प्राची को जहां अन्य छात्रों की तरह 5600 अंकों में परिणाम जारी होना था, वहीं उसे 5300 अंकों के आधार पर मार्कशीट जारी कर दी गई। इससे उसका प्रतिशत 69.67% आया, जबकि सिविल जज (मेंस) परीक्षा के लिए न्यूनतम 70% अंक आवश्यक हैं। छात्रा ने बताया कि वह प्रारंभिक परीक्षा पास कर चुकी थी और मेंस की तैयारी कर रही थी, लेकिन मार्कशीट की त्रुटि ने उसका सपना चूर कर दिया।

हाईकोर्ट ने दिए थे त्रुटि के निर्देश

प्राची ने मामले को लेकर सीनियर एडवोकेट एलएन सोनी और दीपेश जोशी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 28 जुलाई 2025 को निर्देश दिए कि विवि 30 दिनों के भीतर अंक जोड़कर सुधारित परिणाम जारी करे और इसके लिए एक नीति भी तैयार की जाए। फिर भी विवि ने न तो आदेश का पालन किया और न ही अंक सुधारे।

इसके विपरीत विश्वविद्यालय ने 1 नवंबर को इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर कर दी। प्राची ने कहा कि विश्वविद्यालय की एक गलती के कारण वर्षों की मेहनत बेकार हो गई और परिवार का सपना टूट गया। वह एक बार में प्रारंभिक परीक्षा पास कर चुकी थी, लेकिन प्रतिशत कम होने के कारण मुख्य परीक्षा देने का अवसर खो दिया।



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