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Animal Care Tips: अगर पशुपालक थोड़ी समझदारी और सही आहार अपनाएं तो ठंड का मौसम दूध उत्पादन के लिए वरदान बन सकता है. पशु विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड में गायों को संतुलित आहार, पर्याप्त धूप और उचित शेड मिलने पर दूध की मात्रा में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है. (रिपोर्ट: शिवांक द्विवेदी/सतना)
सर्दियों का मौसम शुरू होते ही जहां इंसानों की दिनचर्या बदल जाती है वहीं पशुओं की देखभाल की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है. ठंड में गायों से ज्यादा दूध उत्पादन करवाना एक चुनौती बन जाती है.

लेकिन अगर सही आहार और देखभाल के तरीके अपनाए जाएं तो यही मौसम डेयरी किसानों के लिए मुनाफे का समय साबित हो सकता है. पशु विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड में गायों को संतुलित आहार, पर्याप्त धूप और उचित शेड मिलने पर दूध की मात्रा में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है.

लोकल 18 से बातचीत में पशुचिकित्सक डॉ. बृहस्पति भारती ने बताया कि सतना और आसपास के इलाकों में एचएफ क्रॉस, जर्सी क्रॉस, गिर और साहीवाल जैसी नस्लें पाई जाती हैं जिनकी ठंड में देखभाल विशेष रूप से जरूरी होती है. उन्होंने कहा कि सर्दियों में डेरी शेड तैयार कर लेना पशुपालकों के लिए सबसे अहम कदम है.

शेड में ऊपर पॉलीथिन या हरी चादर लगानी चाहिए ताकि ठंडी हवाओं से बचाव हो सके. इसके साथ ही बाड़े में सूरज की रोशनी आने का भी इंतजाम होना चाहिए ताकि गायों का बॉडी टेम्परेचर मेंटेन रहे, साथ ही उन्हें समय समय पर धूप दिखाए रहे और टहलाते रहें.

डॉ. भारती के अनुसार गायों को हरा चारा, मिनरल मिक्स और पर्याप्त पानी देने से उनकी सेहत सुधरती है और दूध की मात्रा में भी बढ़ोतरी होती है. खाने में खल, सुदाना, अलसी का केक और सरसों का केक जैसे आहार सबसे पौष्टिक माने जाते हैं.

कंसंट्रेशन की मात्रा संतुलित रखना जरूरी है साथ ही चुनी-चोकर को आहार में जोड़ने से भी दूध उत्पादन में मदद मिलती है. पशु चिकित्सक ने यह भी बताया कि सर्दियों में गायों को गुनगुने पानी में गुड़ मिलाकर देना चाहिए.

गुड़ में मौजूद ग्लूकोज गायों को अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान करता है जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है. साथ ही डाइट में कैल्शियम की मात्रा बनाए रखना भी जरूरी है ताकि दूध की गुणवत्ता और मात्रा दोनों बेहतर रहें.

विशेषज्ञों के मुताबिक सही देखभाल वाली सतना में एचएफ नस्ल की गायें एक बार में 15–20 लीटर तक दूध देती हैं जबकि गिर और साहीवाल जैसी स्थानीय नस्लें भी 5–7 लीटर दूध एक बार में देती हैं. ठंड का मौसम अगर सही तरीके से संभाला जाए तो यह किसानों के लिए आय बढ़ाने का सुनहरा मौका साबित हो सकता है.