आरोपी वकील उज्जवल जोशी पर एफआईआर की गई है।
उज्जैन जिले के बड़नगर कोर्ट में दीवानी मामलों की फीस की फर्जी रसीदें बनाकर कोर्ट में पेश करने का फर्जीवाड़ा सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा एक वकील ने कोर्ट फीस के नाम पर किया। फिलहाल 5 लाख 81 हजार रुपए से अधिक के फर्जीवाड़े का ख
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बड़नगर थाना प्रभारी अशोक कुमार पाटीदार ने बताया कि व्यास कॉलोनी निवासी वकील उज्जवल जोशी के खिलाफ न्यायालयीन फीस जमा करने के नाम पर धोखाधड़ी करने की शिकायत 10 नवंबर 2025 को जिला न्यायाधीश न्यायालय से रीडर योगेश ठाकुर ने की थी।
शिकायत में बताया गया कि वकील उज्जवल जोशी ने दीवानी मुकदमों में लगने वाली कोर्ट फीस की फर्जी रसीदें बनाकर उन्हें अलग-अलग मामलों में कोर्ट में पेश किया।
कोर्ट के इन रसीदों का सत्यापन करने पर पाया गया कि आरोपी की पेश रसीदें कूटरचित (फर्जी) हैं। शुरुआती जांच में यह सामने आया कि उज्जवल जोशी ने अब तक 5,81,085 रुपए की धोखाधड़ी की है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी वकील की वकालत की सनद भी किसी और व्यक्ति के नाम से जारी है।
इस पर से थाना बड़नगर में बुधवार को आरोपी उज्जवल जोशी के खिलाफ अपराध क्रमांक 711/25 धारा 18(4), 338, 336(3), 336(4), 340(2), 316(2) बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया गया है।
ऐसे किया फर्जीवाड़ा
दीवानी मामलों जैसे जमीन, जायदाद, मकान, किरायेदार विवाद, चेक बाउंस आदि में दावे दाखिल करते समय हाईकोर्ट की अधिकृत वेबसाइट पर फीस जमा करनी होती है। इस प्रक्रिया में पार्टी का नाम, कोर्ट का नाम, फीस की राशि, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी डालकर ऑनलाइन पेमेंट किया जाता है।
2022 से 2025 के बीच आरोपी उज्जवल जोशी ने अपने पास आए लगभग सभी मामलों में यह फर्जीवाड़ा किया। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी केस में 1 लाख रुपए कोर्ट फीस जमा करनी होती थी, तो वह सिर्फ 10 हजार रुपए ही जमा करता था। रसीद जनरेट होने के बाद वह उसमें एक जीरो बढ़ाकर रकम को 1 लाख दिखा देता था।
सभी फर्जी रसीदों में ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर उज्जवल जोशी का ही था, इसलिए ओटीपी भी उसके फोन पर आता था, जिससे यह फर्जीवाड़ा लंबे समय तक पकड़ा नहीं गया।
एक केस की रसीद फर्जी निकली तो हुआ खुलासा
15 नवंबर 2025 को बड़नगर कोर्ट ने पाया कि एक केस में 2.80 लाख रुपए की फीस की रसीद फर्जी है। जब वकील उज्जवल जोशी से पूछताछ की गई, तो उसने कोर्ट के सामने अपनी गलती स्वीकार करते हुए 2 लाख 80 हजार रुपए की असली फीस जमा कर दी। इसके बाद कोर्ट ने बाकी फाइलें भी जांचने के निर्देश दिए। जांच में कई और फर्जी रसीदें मिलीं, जिससे कुल फर्जीवाड़ा 5.81 लाख रुपए का निकला।