मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड ने ओरछा में “ऐतिहासिक शहर श्रृंखला 2025– ओरछा सिटी एडिशन” विषय पर एक पर्यटन कार्यशाला का आयोजन किया। गुरुवार को ओरछा स्थित होटल बेतवा रिट्रीट में यह कार्यक्रम में किया गया।
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कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ओरछा के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और वास्तुकला महत्व को नई पहचान देना था। इसमें संरक्षण के उपायों पर चर्चा की गई और पर्यटन के माध्यम से स्थानीय विकास को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया। यह तीन घंटे की कार्यशाला गुरुवार दोपहर आयोजित की गई।
कार्यशाला के दौरान कलेक्टर जमुना भिडे ने ओरछा को ऐतिहासिक शहर श्रृंखला में शामिल किए जाने को जिले के लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा कि ओरछा की विश्वस्तरीय पहचान स्थापित करने के लिए स्थानीय नागरिकों और प्रशासन के बीच समन्वय आवश्यक है।
भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश पटेरिया ने ओरछा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को पूरे देश के लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम पर्यटन को नई दिशा देने में सहायक सिद्ध होते हैं।
नगर परिषद ओरछा के अध्यक्ष शिशुपाल राजपूत ने ओरछा की स्वच्छता, सुंदरता और पर्यावरण संरक्षण को यहां के पर्यटन की वास्तविक पहचान बताया।
पुलिस अधीक्षक डॉ. राय सिंह नरवरिया ने पर्यटकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने जानकारी दी कि पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ की गई है और पुलिस दल सदैव सतर्क हैं।
स्थानीय व्यापारी बोले- बड़े निवेशकों को मिल रही सुविधाएं
स्थानीय व्यापारी ऋषभ जैन ने कहा कि बड़े निवेशक, उद्यमी ओरछा में आएं और यहां का विकास करें। इसके लिए उनका स्वागत है। लेकिन पर्यटन विभाग इस पूरी व्यवस्था में स्थानीय लोगों की कितनी सहभागिता रख पा रहा है यह बड़ा सवाल है?
उन्होंने कहा कि बड़े निवेश से बड़े स्टेकहोल्डर को फायदा हो रहा है, पर्यटन विभाग निवेशकों को सुविधाएं भी उपलब्ध करा रहा है। इन सबके बीच स्थानीय लोगों के सामने रोजगार का संकट आ खड़ा हुआ है। कम आबादी में इस शहर मे लोक निर्माण के बीच स्थानीय व्यापारी को अब तक आर्थिक तौर पर सिर्फ घाटा ही हाथ लगा है।
विस्थापन के बाद जिनका व्यापार हजार रूपए था, वह 100 रूपए पर आकर रह गया है। ऐसे मे विभाग छोटे व्यापारी का ध्यान रख विकास हो तो बेहतर होगा।
वहीं पर्यटन विभाग की दी जा रही जमीनों की लीज के सवाल पर विभाग के अधिकारी जवाब नहीं दे पाए। नजर आए। स्थानीय लोगों की मांग थी कि टर्न ओवर और नेटवर्थ के बीच स्थानीय व्यापारी की पहुंच से यह रोजगार के अवसर पूरी तरह दूर रह जाते हैं ऐसे में प्रदेश सरकार को चाहिए की उत्तराखंड सरकार की तर्ज पर स्थानीय लोगों की सहभागिता ऐसे कामों में भी हो ताकि लोगों को रोजगार के अवसर मुहैया हो सके।