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Birsa Munda Statue: गीतांजलि गर्ल्स कॉलेज में आर्ट्स के प्रोफेसर डॉ. कीर्ति सिंह ठाकुर इन दिनों 10 फीट ऊंची और 10 क्विंटल वजनी बिरसा मुंडा की प्रतिमा तैयार कर रहे हैं. ये काम खुद के खर्च पर कर रहे हैं. साथ ही मूर्ति को लुक भी अलग दिया है.
Bhopal News: आदिवासी नायक और क्रांतिकारी बिरसा मुंडा की जयंती पर इस बार कुछ अलग देखने को मिलेगा. भोपाल के गीतांजलि गर्ल्स कॉलेज में आर्ट्स के प्रोफेसर डॉ. कीर्ति सिंह ठाकुर इन दिनों 10 फीट ऊंची और 10 क्विंटल वजनी बिरसा मुंडा की प्रतिमा तैयार कर रहे हैं. तुलसी नगर स्थित अपने निवास पर वे दिन-रात इस मूर्ति को आकार देने में जुटे हैं. लोकल 18 के माध्यम से जानिए आखिर क्या है इसके पीछे की वजह?
लोकल 18 से बात करते हुए डॉ. कीर्ति सिंह ठाकुर ने बताया कि यह मूर्ति बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर 15 नवंबर को बैतूल जिले के भारत भारती परिसर में स्थापित की जाएगी. इस मूर्ति को तैयार करने में मिट्टी के साथ फाइबर, रेजिन, मार्बल पाउडर और व्हाइट सीमेंट का इस्तेमाल किया गया है. पारंपरिक मूर्तियों की तुलना में इसमें ज्यादा मजबूती देने के लिए फाइबर का अनुपात बढ़ाया गया है.
बैतूल जिले के आदिवासी अंचल क्षेत्र टेमनी गांव के रहने वाले डॉ. कीर्ति बताते हैं कि मेरे पिताजी शिक्षक रहे हैं. मेरे पिताजी ने मुझे यह प्रेरणा दी थी कि आप क्या करते हो यह मायने नहीं रखता, मगर किसी के लिए हम कितना बेहतर कर सकते हैं, यह मायने रखता है. मैं पिताजी के साथ जब भी कहीं जाता तो अक्सर उनकी साइकिल के आगे डलिया में पेड़ जरूर होता था. उनका कहना था कि हमें पर्यावरण की रक्षा के लिए पेड़ उगाने बेहद जरूरी है.
खुद के खर्च पर बनाई मूर्ति
उन्होंने बताया कि इस मूर्ति को बनाने के लिए उन्होंने सरकार या किसी अन्य संगठन से किसी प्रकार का सहयोग नहीं लिया है. वे पूरी मूर्ति का निर्माण खुद के खर्चे पर ही कर रहे हैं. फिलहाल, मूर्ति के फिनिशिंग का काम अंतिम चरण में है. डॉ. कीर्ति का कहना है कि यह प्रतिमा केवल एक कला नहीं बल्कि एक विचार का प्रतीक है. उनकी यह कला समाज के लिए पर्यावरण संरक्षण और संस्कृति की रक्षा का संदेश देगी.
बिरसा मुंडा के हाथ में पेड़ की डाल
डॉ. कीर्ति बताते हैं कि अब तक बिरसा मुंडा की अधिकतर मूर्तियों में उन्हें तीर-कमान के साथ दर्शाया गया है, जो उनके वीरता और संघर्ष का प्रतीक है. मगर, इस बार उन्होंने इसमें एक अलग दृष्टिकोण अपनाया है. उनका कहना है कि मैंने बिरसा मुंडा को हाथ में पेड़ की डाल के साथ दिखाया है. यह पेड़ की डाल संरक्षण का प्रतीक है. उनका कहना है कि बिरसा मुंडा ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष किया.
पर्यावरण को बचाना ही सच्ची श्रद्धांजलि
बिरसा मुंडा ने आदिवासी समाज के अधिकारों और अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए आंदोलन चलाया. इसलिए इस मूर्ति के माध्यम से वही संदेश दिया गया है कि पेड़, जंगल और पर्यावरण को बचाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है. कला केवल सौंदर्य या प्रदर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का जरिया भी हो सकती है. वे कहते हैं, मैं चाहता हूं कि इस मूर्ति को देखकर लोग सिर्फ बिरसा मुंडा को याद न करें, बल्कि उनके आदर्शों को समझें और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भी महसूस करें.
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें