मुनि प्रमाण सागर विदिशा पहुंचे: गुरुभाई मुनि सम्भवसागर ने ससंघ कीर्ति स्तंभ पर की अगवानी – Vidisha News

मुनि प्रमाण सागर विदिशा पहुंचे:  गुरुभाई मुनि सम्भवसागर ने ससंघ कीर्ति स्तंभ पर की अगवानी – Vidisha News


गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज भोपाल चातुर्मास पूर्ण करने के बाद पदविहार करते हुए विदिशा पहुंचे। उनके स्वागत के लिए शहर में भारी उत्साह देखने को मिला। कीर्ति स्तंभ पर निर्यापक श्रमण मुनि श्री सम्भवसागर महाराज ने अपने पूरे संघ के साथ उनक

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भोपाल, इंदौर, गंजबासौदा, राहतगढ़, ललितपुर, कोलकाता और जसपुर सहित कई शहरों से हजारों श्रावक-श्राविकाएं विदिशा पहुंचे। सभी श्रद्धालु दोनों गुरुभाइयों के इस ऐतिहासिक मिलन के साक्षी बने। दोपहर में मुनि संघ का सांची से विदिशा तक मंगल विहार हुआ, जिसमें विधायक मुकेश टंडन ने भी शामिल होकर दर्शन किए।

विदिशा में सकल दिगंबर जैन समाज, श्री शीतलविहार न्यास, मुनि सेवक संघ, गुरुवर सेवा समिति, जैन मिलन अरिहंत, शहर की पाठशालाओं, महिला मंडलों और युवाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में मुनि श्री का स्वागत किया। विद्यासागर नवयुवक मंडल और महिला मंडल शोभायात्रा में सबसे आगे चल रहे थे।

इस अवसर पर मुनि श्री सम्भवसागर महाराज ने बताया कि मुनि श्री क्षमासागर जी, समतासागर जी और प्रमाण सागर जी का विदिशा से गहरा संबंध रहा है। 1992, 1995, 1997 और 2002 में मुनि संघ ने विदिशा में लंबे समय तक धर्मप्रभावना की। मुनि श्री प्रमाण सागर ने बताया कि 1992 के नौ माह के प्रवास में गहन शोध के बाद शीतलनाथ भगवान के चार कल्याणक घोषित किए गए थे।

शाम को शीतलधाम में विश्वप्रसिद्ध शंका समाधान कार्यक्रम हुआ, जिसमें जैन समाज के साथ जैनेतर समाजजन भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। धर्मसभा में मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि दान दरिद्रता और दुर्गति का नाशक है। उन्होंने प्रेरक प्रसंग सुनाकर बताया कि कैसे गरीबी में भी किया गया दान जीवन में चमत्कारी सुधार ला सकता है।



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