नक्सलवाद ही नहीं…विचारधारा पर भी चोट, इन बातों से समझिए सरकार का प्लान

नक्सलवाद ही नहीं…विचारधारा पर भी चोट, इन बातों से समझिए सरकार का प्लान


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Balaghat News: नक्सलियों का लोकल सपोर्ट तोड़ने के लिए खुद SP आदित्य मिश्रा नक्सल प्रभावित गांवों का दौरा कर रहे हैं. वह गांव वालों से अपील कर रहे हैं कि वे नक्सलियों की बिल्कुल मदद न करें. वहीं नक्सलियों को सरेंडर कराने की कोशिश भी हो रही है.

बालाघाट. मध्य प्रदेश के बालाघाट के कुछ हिस्से में माओवाद और नक्सलवाद का प्रभाव है. 35 सालों से नक्सलियों का कहर देखने को मिल रहा है लेकिन कुछ सालों से नक्सल मूवमेंट की कमर टूट गई है. अब पूरे एमएमसी जोन में सिर्फ 25 से 30 सक्रिय नक्सली बचे हुए हैं. ऐसे में इसे खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने एक डेडलाइन भी तय की है. सरकार 31 मार्च 2026 तक माओवाद को खत्म करने का दावा कर रही है. सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों में सरकार के प्रति विश्वास बढ़ाने के लिए काफी काम कर रही है. बालाघाट पुलिस ने ग्रामीणों का सरकार के प्रति भरोसा बढ़ाने के लिए 46 थानों और कैंपों में एकल सुविधा केंद्र शुरू किया है. इसके जरिए ग्रामीणों को अलग-अलग सुविधाएं दी जा रही हैं.

ऑपरेशन पहचान- इसके जरिए लोगों के आधार कार्ड बनवाए जा रहे हैं. इसके अलावा लोगों के आयुष्मान योजना, वृद्धा पेंशन आदि के फॉर्म भी भरे जा रहे हैं.

आपकी भूमि आपके द्वार- वन अधिकार पट्टा देने के लिए आपकी भूमि आपके द्वार अभियान शुरू किया है. इसके तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को वनाधिकार पट्टे दिए जा रहे हैं.

रोजगार- बालाघाट के कलेक्टर मृणाल मीना ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि बीते साल से युवाओं का डेटा तैयार कर रहे हैं. इसके लिए प्रशासन बेरोजगार युवाओं की डिजिटल रजिस्ट्री तैयार की जा रही है. ऐसे में उनकी योग्यताओं के मुताबिक एक ब्लू प्रिंट तैयार किया जा रहा है. इसके बाद सीधे ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स सहित दूसरी कंपनियों को बालाघाट बुलाकर उन्हें रोजगार दिया जा रहा है. इस मौके पर उन्हें 15 हजार रुपये से 25 हजार रुपये तक वेतन वाली नौकरियां दिलाई जा रही हैं. बीते साल 2500 बच्चों को रोजगार दिया गया था और इस साल करीब 4000 बच्चों को नौकरी दी गई है. अब तक 6000 से ज्यादा युवाओं को रोजगार दिया जा चुका है.

इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपलेंट- कलेक्टर मृणाल मीना ने आगे कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को तेजी से मजबूत किया जा रहा है. वहीं कनेक्टिविटी के लिए सड़कें और पुल भी बनाए जा रहे हैं. मोबाइल टावरों को भी दुरुस्त किया जा रहा है. वहीं मेडिकल सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए चलती-फिरती एंबुलेंस का इस्तेमाल किया जा रहा है.

नक्सलियों के परिजनों को भी मिलीं सुविधाएं
सरकार की तमाम योजनाओं का लाभ न सिर्फ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के आदिवासियों को मिल रहा है बल्कि उन लोगों के परिजनों को भी मिल रहा है, जिन्हें देश की सरकार और उनके बनाए सिस्टम पर भरोसा नहीं है. दरअसल नक्सल प्रभावित गांव राशिमेटा से ताल्लुक रखने वाले 14 लाख रुपये के इनामी नक्सली संपत की पत्नी हिरोड़ा बाई ने वनाधिकार पट्टे के लिए अप्लाई किया है. वहीं नक्सली संगीता की मां को भी आवास योजना का लाभ मिल चुका है.

नक्सल प्रभावित गांवों का दौरा कर रहे एसपी
इधर नक्सलियों का लोकल सपोर्ट तोड़ने के लिए खुद एसपी आदित्य मिश्रा नक्सल प्रभावित गांवों का दौरा कर रहे हैं, जहां पर वह लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे नक्सलियों की मदद बिल्कुल न करें. वहीं नक्सलियों को आत्मसमर्पण कराने की कोशिश भी हो रही है.

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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