बेटी ने चुना अपनी पसंद का जीवनसाथी, परिवार ने कर दिया पिंडदान

बेटी ने चुना अपनी पसंद का जीवनसाथी, परिवार ने कर दिया पिंडदान


बालाघाट. आजादी के इतने साल बीत गए लेकिन अब भी साथी चुनने के अधिकार पर दबी जुबान में अंकुश लगा हुआ है. अगर कोई हिम्मत कर पसंद का साथी चुनता है, तो समाज की नजर में वह एक ऐसा अपराधी बन जाता है, जिसे माफ नहीं किया जाता. आज हम आपको ऐसी प्रेम कहानी के बारे में बता रहे हैं, जिसमें पिछड़े वर्ग का लड़का सवर्ण वर्ग की लड़की से प्यार करता है. शुरुआत भले ही दोस्ती से होती है लेकिन धीरे-धीरे प्यार परवान चढ़ता है और फिर शादी होती है. शादी के बाद नाराज परिवार जिंदा लड़की का पिंडदान कर देता है.

12 साल की मेघा (बदला हुआ नाम) कक्षा 8 में पढ़ती थी. 16 साल का बादल (बदला हुआ नाम) और मेघा पहली बार ऐसे मिलते हैं, जैसे जन्मों तक मिलने का वादा कर चुके हो. फिर क्या था, लगातार मुलाकातें होती गईं. जितनी मुलाकातें प्यार उतना ही गहरा. धीरे-धीरे प्यार तो बढ़ता है लेकिन बात घर तक पहुंच जाती है. फिर मेघा पर निगरानी रखी जाती है और बादल से बात करने पर सख्त मनाही की जाती है लेकिन प्यार तो प्यार है. साल बीते लेकिन दोनों के बीच प्यार कम न हुआ. बादल पढ़ने के लिए शहर चला जाता है और मेघा वहीं गांव में पढ़ती है. समय बीता लेकिन प्यार वैसे का वैसा ही रहा.

मेघा को प्रताड़ित करने लगे परिजन
एक दौर आया, जब घरवाले मेघा को प्रताड़ित करने लगे. उसे अक्सर परेशान करते और ताना देते कि वह (बादल) दूसरी जात का है. ऐसा करने की हिम्मत क्यों की. आइंदा उससे बात की, तो खैर नहीं. मर भी जाएगी, तो उससे शादी नहीं होने देंगे. मेघा को लगातार परेशान किया जाने लगा, फिर भी उसने हार न मानी.

परिवार ने रचे षड्यंत्र, फिर भी हुई शादी
एक वक्त आया, जब मेघा को घर से करीब 450 किलोमीटर दूर भोपाल पढ़ने के लिए भेजा. वहां भी उसपर निगरानी रखी जाने लगी, फिर भी बादल से बातचीत का सिलसिला चलते रहा. एक वक्त आया, जब बादल को शादी करवाने का झांसा देकर बुलाया गया लेकिन वह पहले भांप चुका था कि कुछ और बात है. ऐसे में वह गया नहीं, फिर मेघा को धमकाया गया कि खाली पेज पर साइन कर दे. वह बादल पर गलत केस करना चाहते थे लेकिन मेघा नहीं मानी, फिर वह एक दिन मौका देखकर भोपाल से भाग निकली और बादल से शादी कर ली. कई दिन इधर-उधर भटकते रहे, फिर एक दिन कोर्ट गए और शादी कर ली. अब दोनों साथ-साथ रहते हैं.

मेघा के परिवार ने किया पिंडदान
जब परिवार की सारी कोशिशें नाकाम हो गईं, तो उन्होंने जीते जी बेटी को मरा हुआ मान लिया. उन्होंने मेघा का पिंडदान कर दिया. यह खबर सुनने के बाद मेघा काफी रोने लगी. उसका अपने माता-पिता से सवाल है कि ऐसी कौन सी बड़ी गलती की है. सिर्फ अपनी पसंद का साथी ही तो चुना है, इसमें क्या गलत है. जाति का क्या है, वो तो इंसान ने बनाई है. बड़ा दिल रखकर माफ भी कर दीजिए.



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