दतिया जिले की भांडेर तहसील में हर मंगलवार होने वाली जनसुनवाई इस सप्ताह तय समय पर शुरू नहीं हो सकी। कार्यक्रम सुबह 11 बजे पंचायत कार्यालय में होना था। शिकायतकर्ता समय पर पहुंच गए, लेकिन कोई भी अधिकारी मौजूद नहीं था। ग्रामीण दोपहर 12 बजे तक इंतजार करते
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दूरस्थ इलाकों से आए ग्रामीण अपनी-अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे। किसी का मनरेगा भुगतान अटका था, किसी को आवास योजना में देरी की शिकायत थी। कई ग्रामीणों ने सड़क मरम्मत की मांग और पंचायत कार्यों में अनियमितता का मुद्दा भी उठाना था। अधिकारियों के न आने से सभी ग्रामीण निराश होकर लौट गए।
ग्रामीणों ने जताई नाराजगी
अधिकारियों की गैरहाजिरी पर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यदि जनसुनवाई में ही अधिकारी उपस्थित नहीं रहेंगे, तो आमजन अपनी समस्याएं लेकर कहां जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि जनसुनवाई को हल्के में लेना प्रशासन की उदासीनता दिखाता है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ अधिकारियों ने अन्य बैठकों में व्यस्त होने का कारण बताया है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जनसुनवाई जैसी व्यवस्था को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, क्योंकि यह आम लोगों के लिए समस्याएं रखने का प्रमुख मंच है।
जिला प्रशासन से कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि जनसुनवाई को औपचारिकता नहीं, बल्कि जनसमस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम बनाया जाए। मामले पर भांडेर एसडीएम सोनाली राजपूत से फोन पर बात करने की कोशिश की गई, लेकिन वे कोई जवाब नहीं दे सकीं और कॉल कट गई।