खोखला हुआ देश का पहला रेलवे ब्रिज, एक करोड़ आया था खर्च, लाल बहादुर शास्त्री ने किया था उद्घाटन

खोखला हुआ देश का पहला रेलवे ब्रिज, एक करोड़ आया था खर्च, लाल बहादुर शास्त्री ने किया था उद्घाटन


इंदौर शहर जितनी तेजी से तरक्की कर रहा है, उतनी ही तेजी से यहां ट्रैफिक का दबाव भी बढ़ता जा रहा है. इसी भारी ट्रैफिक को पिछले 70 साल से चुपचाप सहते आया है शहर के बीचों-बीच स्थित शास्त्री ब्रिज. यह पुल वैसे तो रोज़ लाखों गाड़ियों का भार उठाता है, लेकिन इन दिनों ब्रिज और… चूहे! हां, चूहे दोनों ही शहर में चर्चा का बड़ा विषय बने हुए हैं.

दरअसल, ब्रिज के एक हिस्से पर बड़ा गड्ढा बनने के बाद नगर निगम हरकत में आया. जांच के दौरान वहां बड़े पैमाने पर चूहे के बिल दिखाई दिए, जिसके बाद निगम ने इसे चूहे द्वारा मिट्टी को खोखला करने की समस्या बताया और अब स्थायी समाधान की तलाश शुरू कर दी है. कई जगहों पर चूहे नियंत्रक केमिकल और ट्रीटमेंट भी चल रहा है. लेकिन कहानी का दूसरा पहलू कुछ और ही कहता है.

जब लोकल 18 ने वहां के स्थानीय लोगों और व्यापारियों से बात की, तो उनका कहना था कि हर समस्या के पीछे चूहों को दोष देना ठीक नहीं है. वे कहते हैं कि ये ब्रिज 70 साल पुराना है… रोजाना हजारों गाड़ियां निकलती हैं. अगर चूहों से इतना बड़ा नुकसान होता, तो यह पुल बहुत पहले ही धंस गया होता. आसपास के दुकानदारों का कहना है कि जिस हिस्से में गड्ढा बना, वहां कुछ समय पहले ब्रिज को चौड़ा करने का काम हुआ था. उनका दावा है कि उसी समय निर्माण में हुई लापरवाही की वजह से मिट्टी ठीक से बैठ नहीं पाई. और जैसे ही कोई भारी वाहन वहां से गुजरा ब्रिज का हिस्सा धंस गया.

लोगों का यह भी कहना है कि चूहों से जमीन तो कमजोर हो सकती है, लेकिन इतना बड़ा गड्ढा सिर्फ चूहों से नहीं बनता.फिर भी यह भी सच है कि ब्रिज के नीचे और साइड में बने बिलों में बड़ी संख्या में चूहे रहते हैं. वीडियो में साफ दिख रहा है कि इन बिलों ने मिट्टी को काफी हद तक कमजोर कर दिया है.

इंदौर में बढ़ता जा रहा चूहों का कहर

यह सिर्फ शास्त्री ब्रिज की बात नहीं है. पूरे शहर में कई जगहों पर चूहों का आतंक बढ़ा है.
रीगल चौराहा जो शहर की सबसे व्यस्त जगहों में से एक है वहां गांधी प्रतिमा और तिरंगे के 50 फीट ऊंचे पोल के आसपास जमीन चूहों ने खोखली कर दी है. स्थानीय लोग कहते हैं कि यहां किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है.

शास्त्री ब्रिज का इतिहास, देश का पहला बड़ा रेलवे ओवर ब्रिज
शास्त्री ब्रिज का निर्माण 1953 के आसपास तत्कालीन मध्य भारत सरकार ने कराया था. यह शहर का पहला दो लेन ओवरब्रिज था. इसे देश के शुरुआती रेलवे ओवर ब्रिज में गिना जाता है. इसकी लागत करीब 1 करोड़ रुपये आई थी. उद्घाटन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने किया था. इसे पूरी तरह इंदौर के स्थानीय इंजीनियरों ने डिजाइन और बनाया था.

एक्सपर्ट्स की मानें तो यह ब्रिज बेहद मजबूत है, और यदि इसकी समय पर मरम्मत कर दी जाए तो यह और 15–20 साल आसानी से चल सकता है. फिलहाल नगर निगम ने चूहे नियंत्रण, ब्रिज रिपेयर और स्ट्रक्चर ऑडिट की तैयारियां शुरू कर दी हैं. लोग भी उम्मीद कर रहे हैं कि शहर के इस ऐतिहासिक और व्यस्त ब्रिज की समय रहते मरम्मत हो जाए, वरना ट्रैफिक का बढ़ता दबाव किसी बड़े हादसे की वजह बन सकता है.



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