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एएसपी कार्यालय में सीनियर सिटीजन की पंचायत हुई। इसमें एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी ने शिकायत की कि उनका बेटा उन्हें घर से निकालना चाहता है। बुजुर्ग ने बताया, बच्चों की भलाई के लिए उन्होंने पहले ही जमीन और मकान बेटे के नाम कर दिए थे। अब बेटा उन्हें परेशान करता है और घर छोड़ने को कहता है।
पंचायत में दोनों पक्षों की सुनवाई हुई। एएसपी और पंचायत सदस्यों ने समझाया कि संयुक्त परिवार में खरीदी गई संपत्ति पूरे परिवार की होती है। किसी एक के नाम होने से वह उसकी निजी नहीं हो जाती, जब तक विधिवत बंटवारा न हो। समझाइश के बाद बेटे ने माफी मांगी। माता-पिता को मिठाई खिलाई, पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
माता-पिता ने भी बेटे को माफ कर गले लगाया। यह देख वहां मौजूद लोग भावुक हो गए। एक अन्य मामले में बुजुर्ग महिला ने शिकायत की। उनके पति पैरालाइज हैं। उनके पांच बेटे हैं, जो लड़ाई-झगड़ा और गाली-गलौज करते हैं। पंचायत में बहुओं और बेटों ने अपना पक्ष रखा। पंचायत ने उन्हें समझाया कि माता-पिता को सम्मान देना और सेवा करना जरूरी है। सभी ने वादा किया कि अब माता-पिता को परेशान नहीं करेंगे।
एक ग्रामीण ने बताया कि जमीन बेचने का अनुबंध हुआ था। जमीन खरीदने वाला उसे आगे बेचने की तैयारी कर रहा है, लेकिन पैसे नहीं दे रहा। साथ ही बची जमीन का रास्ता भी नहीं छोड़ा। पंचायत में दोनों पक्षों की सुनवाई हुई।
अनावेदक ने रजिस्ट्री के लिए तैयार होने की बात कही, लेकिन जमीन का नाप नहीं हुआ था। पंचायत ने तय किया कि पहले जमीन का नाप होगा। फिर बिना देरी के पैसे देकर रजिस्ट्री की जाएगी। साथ ही रास्ते का अलग से प्रबंध किया जाएगा। एक और मामले में रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी ने शिकायत की। उन्होंने भाई के बेटे को व्यापार के लिए पैसे दिए थे। वह पैसे वापस नहीं कर रहा था। पंचायत में सुनवाई के बाद अनावेदक ने 31 दिसंबर तक पूरी राशि लौटाने पर सहमति दी।