शुरुआती 20 दिनों में करें गेहूं पर कीटनाशक का सही छिड़काव, एकस्पर्ट ने बताए फसल बचाने वाली ट्रिक

शुरुआती 20 दिनों में करें गेहूं पर कीटनाशक का सही छिड़काव, एकस्पर्ट ने बताए फसल बचाने वाली ट्रिक


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Wheat Growth Care Tips: खेती के चरम सीजन में गेहूं को नुकसान पहुंचाने वाले रोगों और कीटों से बचाने के लिए विशेषज्ञ समय पर छिड़काव को सुनहरा फार्मूला बता रहे हैं. कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि शुरुआती 20 दिनों में फसल पर नजर रखते हुए सही कीटनाशक चुनना और नमी की स्थिति में ही स्प्रे करना पैदावार को तेज़ी से बढ़ाता है और फसल को झुलसा रोग व कीट प्रकोप से सुरक्षित रखता है.

शिवांक द्विवेदी, सतना: सर्दियों की दस्तक के साथ विंध्य क्षेत्र के किसान अब गेहूं की बोनी और देखरेख में जुट चुके हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार पैदावार बढ़ाने का सबसे कारगर उपाय समय पर कीटनाशक और खरपतवारनाशी का छिड़काव है. सतना और आसपास के इलाक़ों में मिट्टी की नमी अभी भी अनुकूल है ऐसे में शुरुआती चरण से लेकर 40 दिन तक की देखरेख फसल के भविष्य को तय करने वाली साबित होती है. बीज उपचार, दीमक रोकथाम और खरपतवार नियंत्रण ये तीन कदम फसल को न सिर्फ़ सुरक्षित रखते हैं बल्कि किसान की कमाई को भी कई गुना कर देते हैं.

बीज उपचार से होती है फसल की मजबूत शुरुआत
खेती विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं की खेती में सबसे पहला और महत्वपूर्ण चरण बीज उपचार है. ट्रीट या अन्य बीज उपचार दवाओं का उपयोग करने से फसल में रोगों की संभावना काफी कम हो जाती है. पेस्टीसाइड एक्सपर्ट अमित सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि 100 ग्राम ट्रीट एक एकड़ के लिए पर्याप्त होता है और इसकी कुल लागत मात्र 150 रुपये आती है. इसे एक से डेढ़ ग्लास पानी में घोलकर बीजों पर समान रूप से छिड़क देने से बीज सुरक्षित हो जाता है और अंकुरण बेहतर होता है.

दीमक से बचाव के लिए अनिवार्य है क्लोरपाइरीफोस का उपयोग
गेहूं की फसल में दीमक एक बड़ी समस्या बन जाती है खासकर उन खेतों में जहां नमी ज्यादा होती है. ऐसे में क्लोरपाइरीफोस एक प्रभावी बचाव विकल्प माना जाता है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बीज उपचार के साथ इसकी शुरुआती खुराक देने से फसल दीमक के हमले से सुरक्षित रहती है और पौधे की बढ़वार लगातार बनी रहती है.

खरपतवार नियंत्रण: पैदावार बढ़ाने की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी
बुवाई के 25 से 40 दिन बाद खेतों में खरपतवार तेजी से उभरने लगते हैं जो गेहूं के पोषक तत्वों को सोख लेते हैं. इस दौरान खरपतवारनाशी का छिड़काव अत्यंत आवश्यक हो जाता है. चौड़ी पत्ती और पतली पत्ती वाले खरपतवारों के लिए अलग-अलग दवाएं उपलब्ध हैं. चौड़ी पत्ती के लिए टाइग्रिव जबकि पतली पत्ती के लिए ओमेगा का उपयोग किया जाता है. अगर खेत में दोनों प्रकार के खरपतवार मौजूद हों तो दोनों दवाओं का मिश्रण डालना ही सबसे बेहतर तरीका है. खरपतवारनाशक के एक चक्र में 300 से 400 रुपये का खर्च आता है लेकिन इसका परिणाम पैदावार में कई कुना वृद्धि के रूप में देखा जाता है. यह भी जरूरी है कि छिड़काव खेत में पर्याप्त नमी होने पर ही किया जाए ताकि दवा प्रभावी रूप से काम कर सके.

120 से 135 दिनों में फसल देगी सुनहरा उत्पादन
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान बीज उपचार और समय पर खरपतवार प्रबंधन को अपनाते हैं तो गेहूं की फसल 120 से 135 दिनों में उत्कृष्ट उत्पादन देती है. सही तकनीक अपनाने से पौधों की बढ़वार भी मजबूत होती है और दाने भरपूर और चमकदार निकलते हैं.

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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

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शुरुआती 20 दिनों में करें गेहूं पर कीटनाशक का सही छिड़काव, जानें एकस्पर्ट से



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