Local18 से बातचीत में ग्राम चोली के गौरव सिंह ठाकुर बताते हैं कि उनके गांव में बीएलओ आए थे और हर घर में फॉर्म देकर चले गए, लेकिन यह तक नहीं बताया कि फॉर्म कैसे भरा जाए. गांव में ज्यादातर किसान और मजदूर हैं, पढ़े-लिखे लोग भी ज्यादा नहीं हैं. कई कॉलम ऐसे हैं जिन्हें समझना ही मुश्किल है. जो पढ़े लिखे हैं, वे लोग जैसे तैसे अपने हिसाब से फॉर्म भर रहे हैं. सबसे बड़ी दिक्कत उन महिलाओं के सामने आ रही है जो शादी करके दूसरे गांव चली गई हैं या दूसरे गांव से यहां आई हैं. उनसे उनके माता-पिता की 2003 की वोटिंग जानकारी मांगी जा रही है. महिलाएं अपने मायके वालों से फोन कर-करके पुरानी जानकारी जुटा रही हैं, लेकिन इतने साल पुरानी डिटेल किसी को याद नहीं. कई लोगों ने अपना एड्रेस बदल लिया है.
22 साल पुरानी जानकारी याद नहीं
मंडलेश्वर के मनोज कुमार मौर्य कहते हैं कि 22 साल पुरानी जानकारी निकालना बेहद मुश्किल भरा काम है. न तो सब लोगों के पास पुराने वोटर कार्ड हैं और न ही किसी को अपने पुराने बूथ याद हैं. कई लोगों की वोटर लिस्ट के भाग क्रमांक बदल चुके हैं, किसी का आधार नहीं है और कुछ के पास कोई दस्तावेज ही नहीं. बीएलओ से पूछो तो कहते हैं, जितना आता है उतना भर दो, उतनी ही जानकारी ऑनलाइन चढ़ा देंगे. लेकिन हमें डर है कि, कहीं अधूरी जानकारी से नाम कट न जाए?
दिनभर लोगों के फॉर्म भर रहा हूं
मंडलेश्वर में वार्ड 10 के फिरोज कुरैशी कहते हैं कि उन्हें पढ़ना-लिखना नहीं आता. बीएलओ घर के सभी सदस्यों के फॉर्म देकर चले गए और यह कहकर गए कि, अगर 2003 में वोट नहीं डाला था तो माता-पिता की जानकारी भर देना. लेकिन, हमें पता ही नहीं कि 2003 में कौन कहां वोट डालता था. अब मैं अपना काम धंधा छोड़कर पढ़े-लिखे लोगों के पास जा रहा हूं, उनसे फॉर्म भरवा रहा हूं. दिनभर यही काम चल रहा है.
बीएलओ नहीं भर रहे फॉर्म
कलीम कुरैशी बताते हैं कि उनके साथ भी यही हुआ. बीएलओ फॉर्म देकर बस इतना कह गए कि भरकर रखना. मैंने दूसरे लोगों से पूछ पूछ कर फॉर्म भर तो लिया, पर अब आस पड़ोस ओर परिचित लोग मेरे पास आते हैं कि उनका फॉर्म भी भर दूं. मैं खुद समझ-समझकर भर रहा हूं. जो काम बीएलओ को करना चाहिए, वह हमें करना पड़ रहा है. लेकिन यह सरकारी फॉर्म है, गलत भर दिया तो कल को परेशानी भी आ सकती है.
बूथ बदले से नाम ढूंढना मुश्किल
कुछ लोग बताते हैं कि जिन बूथों पर वे वोट डालने गए थे, वहां अब उनका नाम नहीं मिल रहा. किसी का नाम नगर की सूची में है, जबकि वे पंचायत के रहने वाले हैं. महेश्वर विधानसभा के एक वोटर ने कहा कि, उनका ओर उनके माता-पिता, भाई-भाभी सभी का नाम 2003 की सूची में भाग 58 में मौजूद है, लेकिन पत्नी का नाम नहीं मिल रहा है, जबकि उनका SIR फॉर्म आया है. आखिर में पूरे नगर के एक एक बूथ की सभी सूचियों के प्रिंटआउट दुकान से निकलवाए, फिर 5 दिन तक नाम ढूंढा तब जाके दूसरे भाग (बूथ) में मिला. इस उलझन के कारण कई लोग समझ ही नहीं पा रहे कि सही जानकारी कहां से और कैसे मिलेगी.
पढ़े लिखें नहीं, कैसे भरें फॉर्म
नाम नहीं बताने की शर्त पर एक महिला ने अपनी परेशानी साझा करते हुए कहा कि उनका प्रेम विवाह हुआ था, जिससे परिवार और रिश्तेदारों ने नाराज होकर संबंध तोड़ लिए. “मेरे पिता ने कई साल पहले गांव बदल लिया. अब मुझे नहीं पता कि 2003 में उन्होंने वोट कहां डाला था. जबकि फॉर्म में उनके बारे में डिटेल भरनी है. मुझे ऑनलाइन लिस्ट निकालना नहीं आता, मैं पढ़ी-लिखी नहीं हूं. मैं किससे पूछूं और कहां से जानकारी लाऊं?”