कोविड-19 महामारी में बुरे फंसे थे गौतम गंभीर… अब कोर्ट से मिली राहत, रद्द हुई शिकायत

कोविड-19 महामारी में बुरे फंसे थे गौतम गंभीर… अब कोर्ट से मिली राहत, रद्द हुई शिकायत


भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के हेड कोच और पूर्व सांसद गौतम गंभीर इन दिनों साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में सवालों के घेरे में हैं. उनकी कोचिंग में टीम इंडिया पर दूसरी घरेलू सीरीज हार का खतरा मंडरा रहा है. इस बीच गंभीर को क्रिकेट से दूर एक बड़ी गुड न्यूज मिली है. उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट से राहत मिली है. शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने गौतम गंभीर, उनके एक संगठन और अन्य के खिलाफ कोविड-19 महामारी के दौरान दवाओं के कथित भंडारण और बिना लाइसेंस वितरण के मामले को खारिज कर दिया.

गंभीर के खिलाफ नहीं मिला सबूत

कोर्ट ने पाया कि जांच में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि गंभीर या उनके फाउंडेशन ने किसी भी तरह से दवाओं का अनुचित लाभ उठाया या अवैध तरीके से वितरण किया है. जस्टिस नीना बसंल कृष्णा ने अपने आदेश में कहा, “आपराधिक शिकायत रद्द की जाती है.” आम आदमी पार्टी (आप) की तत्कालीन दिल्ली सरकार के औषधि नियंत्रण विभाग ने पूर्वी दिल्ली के तत्कालीन सांसद गौतम गंभीर, उनके एनजीओ, फाउंडेशन की सीईओ अपराजिता सिंह, गौतम गंभीर की मां सीमा गंभीर और पत्नी नताशा के खिलाफ औषधि एवं कॉस्मेटिक्स अधिनियम की धारा 18(सी) के साथ धारा 27 (बी) (2) के तहत शिकायत दर्ज की थी.

Add Zee News as a Preferred Source


ये भी पढ़ें.. 100 साल के इतिहास ने ली करवट… 19 विकेट से दहशत में बल्लेबाज, पर्थ में मचा हाहाकार

गंभीर को हो सकती थी ये सजा

औषधि एवं कॉस्मेटिक्स अधिनियम की धारा 18(सी) बिना लाइसेंस दवाओं के निर्माण, बिक्री या वितरण को प्रतिबंधित करती है, जबकि 27(बी) (2) में बगैर लाइसेंस दवा वितरण पर 3-5 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है.
इस मामले में पूर्व सांसद गौतम गंभीर के अलावा, नताशा गंभीर, सीमा गंभीर और अपराजिता सिंह को भी नोटिस भेजा गया था.

कैसे हुई थी शुरुआत?

सितंबर 2021 में हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाई थी. इसके बाद दलीलों का दौर चलता रहा और अप्रैल 2024 में अदालत ने यह स्थगन हटा लिया. ड्रग कंट्रोल विभाग ने आपत्ति जताई थी कि गौतम गंभीर को सीधे हाईकोर्ट नहीं, बल्कि पहले सेशन कोर्ट जाना चाहिए था. इसके साथ ही तर्क था कि फाउंडेशन ने यह स्वीकारा है कि दवाएं बिना लाइसेंस के बांटी गईं, लेकिन बेची नहीं गईं. हालांकि, अदालत ने इन सभी तर्कों को दरकिनार किया और शिकायत खारिज कर दी.



Source link