बैतूल जिले के आमला में भरण-पोषण आदेश का पालन न करने पर अदालत ने एक व्यक्ति को एक साल साधारण कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह कार्रवाई घरेलू हिंसा एवं महिला संरक्षण अधिनियम 2005 की धारा 31 के तहत की गई। बताया जा रहा है कि जिले में
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मामला वर्ष 2010 का है, जब पत्नी ने स्वयं और बच्चों के लिए शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि पति ने बिना तलाक लिए दूसरी शादी कर ली और किसी भी तरह का भरण-पोषण देने से इंकार कर रहा था। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कुशाग्र अग्रवाल की अदालत ने मामले की सुनवाई की।
सात साल तक नहीं दी एक भी किस्त
अदालत ने पत्नी और दो बच्चों के लिए कुल 10,000 रुपये मासिक भरण-पोषण का आदेश दिया था, जिसमें सीआरपीसी की धारा 125 के तहत 5,000 और घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत 5,000 रुपये शामिल थे। यह आदेश वर्ष 2010 से प्रभावी था। पति ने 2018 में आदेश के खिलाफ अपील भी की, लेकिन अपील खारिज हो गई। इसके बावजूद उसने सात वर्षों तक एक भी किस्त जमा नहीं की।
अदालत ने आदेश का उल्लंघन मानते हुए सुनाई सजा
लगातार अवहेलना को अदालत ने संरक्षण आदेश का गंभीर उल्लंघन माना। अदालत ने जुर्माने की पूरी राशि पीड़िता को देने के निर्देश दिए। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता राजेंद्र उपाध्याय ने बताया कि आमला न्यायालय में यह पहला मामला है, जिसमें भरण-पोषण और संरक्षण आदेश न मानने पर आरोपी को सजा दी गई है।