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प्रकृति प्रेमी संदेश गुप्ता कहते हैं कि बया पक्षी का रंग हल्का पीला-भूरा होता है. आकार भी बहुत बड़ा नहीं, लेकिन उसकी मेहनत और समझदारी किसी बड़े इंजीनियर से कम नहीं है. घोंसला बनाने के लिए यह नर बया ही पूरा प्रयास करता है. वह दूर तक उड़कर अच्छे और मजबूत घास के तिनके जुटाता है.
जंगलों की दुनिया जितनी शांत लगती है. उतनी ही गहराई में रहस्यमयी भी है. पेड़ों के बीच, शाखों के सहारे और हवा की सरसराहट में कई ऐसे पक्षी रहते हैं. जिनकी आदतें और हुनर देखकर कोई भी दंग रह जाए. इन्हीं में से एक बया पक्षी है. जिसे कुदरत का असली इंजीनियर कहा जाता है. मध्य प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में यह छोटे आकार का पक्षी अपने अनोखे घोंसले की वजह से सबसे अलग पहचान रखता है.
आपने बहुत से पक्षियों को अपने लिए घोंसला बनाते देखा होगा, लेकिन बया पक्षी का घोंसला बाकी सभी से बिल्कुल अलग होता है इसकी कारीगरी देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी कुशल कारीगर ने महीनों मेहनत कर यह घर तैयार किया हो. सबसे खास बात यह है कि इसका घोंसला इतना मजबूत और चालाकी से बनाया जाता है कि शिकारी पक्षी, बड़े जीव या यहां तक कि सांप भी इसके अंदर घुसने की हिम्मत नहीं कर पाते. यही वजह है कि इसे जंगल का सुरक्षा विशेषज्ञ पक्षी भी कहा जाता है.
घोंसला एक पेंडुलम की तरह बाहर लटकता
प्रकृति प्रेमी संदेश गुप्ता कहते हैं कि बया पक्षी का रंग हल्का पीला-भूरा होता है. आकार भी बहुत बड़ा नहीं, लेकिन उसकी मेहनत और समझदारी किसी बड़े इंजीनियर से कम नहीं है. घोंसला बनाने के लिए यह नर बया ही पूरा प्रयास करता है. वह दूर तक उड़कर अच्छे और मजबूत घास के तिनके जुटाता है. फिर चुनी हुई डाली पर अपना घर बनाना शुरू करता है. घोंसला एक पेंडुलम की तरह बाहर लटकता है. भीतर की तरफ एक सुरक्षित कक्ष होता है जहां मादा बया और अंडे सुरक्षित रह सकें.
घोंसले की बाहरी दीवारें मजबूत होती
घोंसला बनाने की कला में इस पक्षी की सबसे खास बात यह है कि वह हर तिनके को ऐसे बुनता है मानो धागे से सिलाई कर रहा हो. घोंसले की बाहरी दीवारें इतनी मजबूत होती हैं कि तेज आंधी या बारिश भी आसानी से इसे नुकसान नहीं पहुंचा पाती. बया पक्षी पानी के बहाव और मौसम के बदलते हालात को ध्यान में रखकर घोंसले को ऊंचाई पर बनाता है. यह पक्षी मौसम का अंदाजा भी पहले से लगा लेता है. इसलिए बारिश के दिनों में इसके बनाए घोंसले सुरक्षित बने रहते हैं. शिकारी जानवरों से बचने के लिए बया पक्षी एक खास तरीका अपनाता है. वह घोंसले का मुंह नीचे की ओर रखता है, ताकि कोई भी बड़ा पक्षी या सांप सीधे अंदर प्रवेश न कर सके। मुंह की घुमावदार संरचना ऐसे बनाई जाती है कि चाहे बाहर कितना भी खतरा क्यों न हो, अंदर रहने वाले बच्चे सुरक्षित रहें. सांप के लिए यह घोंसला लगभग असंभव सा लगता है.
मादा को घोंसला पसंद आता
घोंसला तैयार होने के बाद नर बया उसे मादा बया को दिखाता है. अगर मादा को घोंसला पसंद आता है तभी वह उसमें रहने के लिए तैयार होती है. कई बार मादा घोंसले को देखते ही समझ जाती है कि नर कितना जिम्मेदार और मेहनती है. अगर उसे घोंसला पसंद न आए तो नर बया उसे छोड़कर नए सिरे से घोंसला तैयार करता है. इस पूरी प्रक्रिया में उसकी धैर्य और रचनात्मकता देखने लायक होती है.