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Agriculture News: अशोक पाल ने लोकल 18 से कहा कि कटिया गेहूं की खेती में किसी भी तरह की रासायनिक खाद की जरूरत नहीं पड़ती है. किसान भाई गोबर खाद ही डालकर बुवाई कर देते हैं. अगर गोबर खाद भी नहीं डालते हैं, तो भी फसल उग जाती है.
छतरपुर. आज हम आपको गेहूं की एक ऐसी वैरायटी के बारे में बताने जा रहे हैं, जो मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में देखने को मिलती है. दरअसल जिले में कटिया गेहूं (Katiya Gehun Ki Kheti Tips) की खेती वर्षों से होती आ रही है. इस गेहूं की खासियत है कि इसमें लागत कम आती है और मुनाफा तगड़ा होता है. इसकी खेती में खाद और पानी की भी ज्यादा जरूरत नहीं होती है, साथ ही यह गेहूं असिंचित जमीन पर भी उग जाता है.
कटिया गेहूं के लिए काली मिट्टी सबसे बेहतर
उन्होंने कहा कि कटिया गेहूं के लिए काली मिट्टी उपयुक्त होती है. यह फसल काली मिट्टी में ही पैदा होती है क्योंकि यह मिट्टी पानी को संरक्षित करके रखती है. इस मिट्टी में शीत बनी रहती है. पथरीली या पीली मिट्टी में इस गेहूं की खेती नहीं होती है.
रासायनिक खाद की जरूरत नहीं
उन्होंने आगे कहा कि कटिया गेहूं में किसी भी तरह की रासायनिक खाद की जरूरत नहीं पड़ती है. किसान गोबर खाद ही डालकर बुवाई कर देते हैं. गोबर खाद भी नहीं डालते हैं, तो भी फसल हो जाती है.
कम लागत में ज्यादा उपज
अशोक पाल ने कहा कि कटिया गेहूं की फसल में खर्च बहुत कम आता है. जुताई-बुवाई का ही खर्च रहता है. इसके अलावा न इसमें रासायनिक खाद की जरूरत है और न ही पानी की. बस खेत बनाना पड़ता है. खेत अगर अच्छा बना लिया, तो आराम से चार क्विंटल का एक बीघा तो हो ही जाता है. अगर नहीं भी अच्छा बना, तो भी दो क्विंटल का बीघा निकलता है.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.