सर्दियों में मछली पालन और आसान: नए फॉर्मूले से बढ़ी फिश ग्रोथ, नुकसान का…

सर्दियों में मछली पालन और आसान: नए फॉर्मूले से बढ़ी फिश ग्रोथ, नुकसान का…


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Satna News: सर्दियों में पानी का तापमान गिरने से ऑक्सीजन का स्तर तेजी से कम होता है, जिससे मछलियों की भूख और मूवमेंट दोनों पर असर पड़ता है. एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि सुबह और शाम एरेटर्स चलाकर ऑक्सीजन संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है.

सतना. सर्दियों के मौसम में तालाबों का तापमान जैसे-जैसे गिरता है, वैसे-वैसे मछलियों की ग्रोथ, एक्टिविटी और सर्वाइवल पर सीधा प्रभाव पड़ता है. ऐसे समय में जरा सी लापरवाही से भारी नुकसान भी हो सकता है. ठंड की मार से बचने और स्वस्थ उत्पादन हासिल करने के लिए फिश फार्मर्स अब नए फार्मूले अपनाने लगे हैं, जिसमें रात में तालाब ढकना, पानी में पर्याप्त ऑक्सीजन बनाए रखना और धूप निकलने पर हल्की वॉटर एक्सचेंज जैसी तकनीकें शामिल हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि ये छोटे बदलाव मछली पालन को ठंड में भी सुरक्षित और मुनाफेदार बना सकते हैं.

सर्दियों में पानी का तापमान गिरने से ऑक्सीजन लेवल तेजी से कम होता है, जिससे मछलियों की भूख और मूवमेंट दोनों प्रभावित होते हैं. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सुबह और शाम एरेटर्स चलाकर ऑक्सीजन संतुलन बनाए रखना बहुत आवश्यक है. साथ ही लगातार फीडिंग पैटर्न फॉलो करने से मछलियां एक्टिव रहती हैं और ठंड का असर कम होता है.

धूप में पानी बदलना फायदेमंद
रात के समय प्लास्टिक शीट या नेट से तालाब को आंशिक रूप से ढकने से तापमान नियंत्रित रहता है. वहीं दिन में हल्की धूप पड़ने पर 10–15 फीसदी पानी की अदला-बदली करने से मछलियों के लिए बेहतर वातावरण बनता है. बीमार या कमजोर मछलियों को तुरंत अलग टैंक में रखना भी रोग फैलने से रोकता है.

रेनी सीजन मेन ब्रीडिंग पीरियड
लोकल 18 से बातचीत में मध्य प्रदेश के सतना के पशु चिकित्सक डॉ बृहस्पति भारती बताते हैं कि मछलियों का मुख्य ब्रीडिंग पीरियड बरसात का मौसम है. इस समय एक मछली में हजारों अंडे होते हैं, इसलिए सरकार भी अक्सर मछुआरों से अनुरोध करती है कि रेनी सीजन में पकड़ कम करें ताकि प्राकृतिक वृद्धि को नुकसान न हो.

पोल्ट्री-फिशिंग मॉडल: डबल मुनाफे का फॉर्मूला
उन्होंने सुझाव दिया कि कई फिश फार्मर्स तालाब के ऊपर पोल्ट्री शेड बनाकर डबल बेनिफिट ले रहे हैं. पोल्ट्री फीड के कण तालाब में गिरकर मछलियों के भोजन का काम करते हैं, वहीं मुर्गियों का मल भी प्राकृतिक खाद बनकर फिश ग्रोथ बढ़ाता है. इससे लागत कम और उत्पादन तेज मिलता है.

ठंड में बिक्री में बढ़त
ठंड के मौसम में मछलियों की मार्केट में डिमांड सबसे ज्यादा होती है क्योंकि बरसात के दौरान कल्टीवेशन के बाद नवंबर-दिसंबर तक बड़े पैमाने पर तैयार स्टॉक उपलब्ध हो जाता है. ऐसे में सही तकनीक अपनाकर किसान इस सीजन में बेहतर कमाई कर सकते हैं.

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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