बिरसा मुंडा कार्यक्रम से लापता हुए बुजुर्ग: 13 दिन बाद भी नहीं पता चला, परिजन परेशान;आदिवासी कांग्रेस की चेतावनी-जल्द करो तलाश वरना आंदोलन – Jabalpur News

बिरसा मुंडा कार्यक्रम से लापता हुए बुजुर्ग:  13 दिन बाद भी नहीं पता चला, परिजन परेशान;आदिवासी कांग्रेस की चेतावनी-जल्द करो तलाश वरना आंदोलन – Jabalpur News


जबलपुर के गैरीसन मैदान में 15 नवंबर को आयोजित बिरसा मुंडा जयंती व जनजातीय गौरव दिवस समारोह में शामिल होने पहुंचे 62 वर्षीय बुजुर्ग रहस्यमय तरीके से गायब हो गए। कार्यक्रम को 13 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक बुजुर्ग का कोई पता नहीं चल पाया है। परिजनों

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गुमशुदा बुजुर्ग किशन लाल कोल माढ़ोताल थाना क्षेत्र के मंगेला ग्राम के निवासी हैं। गांव के सरपंच द्वारा कार्यक्रम के लिए बस की व्यवस्था की गई थी और किशन लाल उसी में अन्य ग्रामीणों के साथ जबलपुर आए थे। कैंट थाना पुलिस ने किशन लाल कोल की गुमशुदगी दर्ज कर तलाश शुरू कर दी है।

खाना खाने के बाद अचानक लापता

कार्यक्रम में साथ गए ग्रामीण गरीब लाल के मुताबिक

किशन लाल ने कार्यक्रम के बाद खाना लिया और बस के पास आकर बैठ गए थे। जब बस रवाना होने लगी तो वह दिखाई नहीं दिए। काफी देर तलाश करने के बाद भी पता नहीं चल सका, जिसके बाद रात करीब 10 बजे गांव लौटकर परिजनों को सूचना दी गई।

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शाम को बस के साथ सभी लोग वापस मंगेला पहुंच गए, लेकिन किशन लाल नहीं लौटे। इसके बाद लगातार खोजबीन जारी है, पर कुछ सुराग नहीं मिला।

कांग्रेस ने उठाए सवाल, आंदोलन की चेतावनी

जिला प्रशासन के कार्यक्रम से बुजुर्ग के गायब होने पर कांग्रेस ने सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। आदिवासी कांग्रेस संघ के जिला अध्यक्ष निलेश बरकड़े ने कहा कि जब राज्य सरकार और जिला प्रशासन की देखरेख में कार्यक्रम आयोजित किया गया था और गांव के लोग सरकारी व्यवस्था से लाए गए थे, तो किशन लाल को सुरक्षित घर पहुंचाना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि जल्द ही उनका पता नहीं चलता तो प्रशासन के खिलाफ उग्र आंदोलन किया जाएगा।

पुलिस की तलाश जारी

थाना प्रभारी पुष्पेंद्र पटले के अनुसार बुजुर्ग की तलाश के लिए कई टीमें लगाई गई हैं। यह भी संभावना है कि वे बिना जानकारी दिए किसी रिश्तेदार के यहां चले गए हों। सभी संभावित स्थानों पर खोज जारी है।

परिजनों की हालत खराब

13 दिन से किशन लाल के बारे में कोई सूचना ना मिलने से परिजन परेशान हैं। उनका कहना है कि अगर शुरू से ही प्रशासन और पुलिस ने गंभीरता दिखाई होती तो शायद आज वे अपने घर वापस मिल जाते।



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