IAS संतोष वर्मा पर केस दर्ज करने को लेकर परिवाद: बेहूदा टिप्पणी के खिलाफ इंदौर के एडवोकेट ने ली कोर्ट की शरण; 4 दिसंबर को होगी सुनवाई – Indore News

IAS संतोष वर्मा पर केस दर्ज करने को लेकर परिवाद:  बेहूदा टिप्पणी के खिलाफ इंदौर के एडवोकेट ने ली कोर्ट की शरण; 4 दिसंबर को होगी सुनवाई – Indore News



मध्यप्रदेश के IAS संतोष वर्मा की ब्राह्मण समाज की बेटियों पर की गई टिप्पणी का मामला थम नहीं रहा है। अब इंदौर के एक एडवोकेट ने उनके खिलाफ जिला कोर्ट में परिवाद लगाया है। जिसमें केस दर्ज करने की मांग की है। मामले में 4 दिसंबर को सुनवाई होगी।

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परिवाद एडवोकेट शैलेंद्र द्विवेदी ने 28 नवंबर को दायर किया है। जिसमें बताया है कि संतोष वर्मा जो कि SC-ST अधिकारी कर्मचारी संगठन के प्रांत अध्यक्ष हैं। वे एक आईएएस अधिकारी हैं। 25 नवंबर को भोपाल में अजाक्स के प्रांतीय अधिवेशन आयोजित था। इसमें संतोष वर्मा की भाषण के दौरान जुबान ऐसी फिसली की उनके मुंह से एक ब्राह्मण जाति की बेटियों के बारे में बेहूदा, अश्लील, घटिया और निम्न स्तर की टिप्पणी की गई है।

इस प्रकार की टिप्पणी घटिया मानसिकता परिवाद में कहा है कि इस प्रकार की टिप्पणी एक जिम्मेदार आईएएस परीक्षा पास करने वाले व्यक्ति के मुंह से करना उनकी न सिर्फ घटिया मानसिकता जाहिर करती है, बल्कि ऐसी टिप्पणी करना प्रथम दृष्टया सामाजिक समरसता को ठेस पहुंचाने और आपसी वैमनस्यता उत्पन्न करने वाली है। ऐसा भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी से अपेक्षित चरण के अनुरूप नहीं है। इसकी भरपाई नहीं की जा सकती।

आईएएस परीक्षा में चयन होने पर उन्हें शपथ दिलाई जाती है। इसमें सर्वप्रथम शपथ इस बात की ली जाती है कि वह किसी भी भेदभाव व विद्वेषता की भावना अपने मन में नही रखकर सेवा करेगा परंतु वर्मा ने शपथ का ही उल्लंघन किया है।

अश्लील व अपमानित करने वाली टिप्पणी से पूरे विश्व के ब्राम्हण समाज का व्यक्ति अपने आपको अपमानित मान रहा है। इससे ब्राह्मण समाज आहत हुआ है। वर्मा के खिलाफ थाना क्षेत्र तुकोगंज, केस दर्ज करने के लिए लिखित शिकायत भी की लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इस कारण कोर्ट की शरण में आना पड़ा।

वर्मा के खिलाफ फर्जी दस्तावेज और धोखाधड़ी का केस परिवाद में बताया गया कि वर्मा का आचरण पूर्व में कोई अच्छा नहीं है। उनके खिलाफ फर्जी दस्तावेज (कोर्ट के आदेश) गढ़ने और धोखाधड़ी का प्रकरण इंदौर के ही कोर्ट में विचाराधीन है। इसमें उन्हें जेल जाना पड़ा।

जिला कोर्ट और हाई कोर्ट से जमानत निरस्त होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 24 जनवरी 2022 को सशर्त जमानत पर छोड़ने का आदेश दिया था। इसके अलावा एक अन्य केस भी विचाराधीन है। अतिरिक्त अन्य आपराधिक प्रकरण धारा 323 व अन्य का भी विचाराधीन है।

एडवोकेट का कहना है कि वर्मा ने न सिर्फ आपराधिक कृत्य किया है, बल्कि वे अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम 1968 के नियत 3(1), 3(2) (बी) (1) (11) के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही के भी अधिकारी हैं। उनका कृत्य भादवि की धारा 295, 295(क), 298, 500 और बीएनएस की धारा 299, 302 व 356(2) के तहत अपराध की श्रेणी का है। यह कारावास से दंडित किए जाने योग्य है।

कोर्ट से मांग की गई है कि धारा 156 (3) दंड प्रक्रिया संहिता बीएनएसएस की धारा 175 के तहत थाना तुकोगंज को निर्देशित करें कि आवेदनकर्ता द्वारा पेश की गई शिकायत पर वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विधिवत विवेचना करें।



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