जब-जब जुल्म होगा…जिहाद भी होगा,मौलाना के बयान पर प्रदर्शन आज: भोपाल में बजरंग दल-वीएचपी करेंगे विरोध, रोशनपुरा पर होंगे इकट्ठा – Bhopal News

जब-जब जुल्म होगा…जिहाद भी होगा,मौलाना के बयान पर प्रदर्शन आज:  भोपाल में बजरंग दल-वीएचपी करेंगे विरोध, रोशनपुरा पर होंगे इकट्ठा – Bhopal News


मौलाना महमूद मदनी भोपाल में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की गवर्निंग बॉडी की बैठक में शामिल हुए थे।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी के बयान को लेकर विरोध तेज हो गया है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल रविवार दोपहर 1 बजे रोशनपुरा चौराहा, न्यू मार्केट पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। संगठनों ने इसे देश और हिंदू समाज के खिलाफ दिया गया बयान बताते

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बजरंग दल का कहना है कि मौलाना मदनी ने वंदे मातरम, देश और हिंदू धर्म के खिलाफ बयान दिए हैं। संगठन ने कहा कि इन वक्तव्यों का कड़ा विरोध किया जाएगा और सरकार से कार्रवाई की मांग की जाएगी।

वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता की प्रतिक्रिया

विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि मदनी जैसे लोग मुस्लिम युवाओं को ‘जुल्म, जन्नत और जिहाद’ जैसे नारों के नाम पर भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कट्टरपंथी तत्व देश की न्याय व्यवस्था और राष्ट्रीय स्वाभिमान को आहत करने की कोशिश कर रहे हैं।

बंसल ने कहा कि मुस्लिम समाज को भी समय रहते ऐसे कट्टरपंथी तत्वों से दूरी बनानी होगी। उनका आरोप है कि हलाल के नाम पर अवैध कमाई कर आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिश की जाती है, लेकिन अब ऐसा संभव नहीं होगा।

मदनी ने कहा था- जब-जब जुल्म होगा…जिहाद भी होगा

भोपाल में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की गवर्निंग बॉडी की बैठक में शनिवार को मौलाना महमूद मदनी ने कहा था कि मौजूदा दौर में इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने की कोशिशें बढ़ गई हैं। जिहाद जैसे मुकद्दस शब्द को आतंक और हिंसा से जोड़ना जानबूझकर किया जा रहा है।

उन्होंने कहा- लव जिहाद, लैंड जिहाद, थूक जिहाद जैसे शब्द मुसलमानों को बदनाम करने के लिए गढ़े गए हैं। इस्लाम में जिहाद का मतलब अन्याय और ज़ुल्म के खिलाफ संघर्ष है। जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा।

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भोपाल में मौलाना महमूद मदनी ने कहा, मुसलमानों को लगातार टारगेट किया जा रहा है और उनके धार्मिक पहनावे, पहचान और जीवनशैली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुसलमान इस देश के बराबर के नागरिक हैं, लेकिन शिक्षा, रोज़गार और सामाजिक बराबरी के अधिकार जमीनी स्तर पर कमजोर हो रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…



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