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Winter Famous Sweet: एमपी के छतरपुर में ठंड में एक ऐसा लड्डू खाया जा जाता है, जिसमें न तो तेल-घी डाला जाता और न ही शक्कर. फिर भी यह लड्डू जिले का प्रसिद्ध लड्डू है. दरअसल, यह लड्डू गुड़ और लाई से बनाया जाता है, जिसकी मांग जिले में ठंड के मौसम में बढ़ जाती है. जानें इसकी कीमत…
सर्दी के मौसम में वैसे तो बाजार में बहुत से फूड आइटम बिकने शुरू हो जाते हैं, लेकिन छतरपुर में ठंड के सीजन में एक ऐसा आइटम बिकता है, जिसे सबसे ज्यादा खाया जाता है.

इसे लाई का लड्डू कहा जाता है. वैसे तो ये 12 महीने बाजार में मिलता है, लेकिन ठंड में इसकी डिमांड सबसे ज्यादा होती है. जिले में यह सालों से परंपरागत तरीके से बनाया जा रहा है. इस परंपरागत लड्डू को लाई और गुड़ से बनाया जाता है. ये सर्दी में गर्मी का एहसास देता है.

इस लड्डू को बनाने के लिए न तो तेल की आवश्यकता होती है, न ही घी और न ही शक्कर की आवश्यकता होती है. फिर भी यह लड्डू जिले का प्रसिद्ध लड्डू कहलाता है.
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बीते10 साल से लाई लड्डू बना रहे महेश गुप्ता बताते हैं कि यह लड्डू सभी जगह खाया जाता है, लेकिन छतरपुर में यह अलग ही तरीके से बनाया जाता है. यहां के लोग इसे खाते भी बहुत हैं.

महेश बताते हैं कि लाई के लड्डू बनाने के लिए सबसे पहले गुड़ को गर्म किया जाता है. फिर इसका सीरा तैयार होता है. इसके बाद गुड़ के सीरे में कुरकुरी लाई मिलाकर लड्डू बांधे जाते हैं. लड्डू बांधने का अनुपात बराबर होता है मतलब 1 किलो गुड़ में 1 किलो लाई मिलाकर लड्डू बनाते हैं.

महेश के मुताबिक, लाई के लड्डू यहां 12 महीने खाया जाता है. लेकिन, ठंड में बहुत ज्यादा मांग होती है. क्योंकि, यहां के लोग ठंड में गुड़ खाते हैं और यह गुड़ का ही लड्डू होता है. साथ ही ये वजन में हल्का और सस्ता होता है.

लाई-गुड़ के इस लड्डू के सेवन से शरीर में आयरन की कमी नहीं होती है. साथ ही इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, फॉस्फोरस आदि भी होते हैं. शरीर में हीमोग्लोबिन के लेवल को बनाए रखने के लिए गुड़ खाना हेल्दी होता है.

लाई के लड्डू की बात करें, तो ये जिले के ग्रामीण इलाकों में सबसे ज्यादा खाया जाता है. इसे छोटे बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक पसंद करते हैं. इसके भाव की बात करें तो 20 रुपए में 250 ग्राम मिल जाते हैं. एक किलो के भाव की बात करें तो ये 60 से 80 रुपए किलो मिल जाता है.