रिपोर्ट- मिथिलेश गुप्ता
इंदौर. देश के सबसे स्वच्छ इंदौर में शहर में चूहों का डर. इंदौर में अब तक दो मासूम नवजात बच्चों की चूहों के कुतरने की वजह से जान जा चुकी है. एयरपोर्ट पर चूहे के काटने की वजह से सॉफ्टवेयर इंजीनियर को बेंगलुरु में इंजेक्शन लगवानी पड़ी तो वहीं इंदौर के लगभग 100 साल पुराने शास्त्री ब्रिज के सड़क का एक हिस्सा भी धंस चुका क्योंकि चूहों के बिल ने ब्रिज को अंदर से खोखला कर दिया था. गनीमत रही जब सड़क धंसी उस वक्त ज्यादा वाहन वहां से नहीं गुजरी क्योंकि दिन रविवार का था वरना बड़ा हादसा हो सकता था. ट्रेन के अंदर भी चूहों से परेशान यात्रियों का वीडियो अभी आ चुका है सामने. लेकिन इन मामलों के सामने आने के बाद देश के सबसे स्वच्छ शहर जो पिछले 8 सालों से स्वच्छता में अव्वल है उसी शहर से चूहों के काटने वाले चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं. चूहों के आगे बेबस इंदौर का सरकारी सिस्टम सवाल यही रैट बाइट के लिए कौन – कौन है जिम्मेदार. रैट बाइट को रोकने के लिए नगर निगम का क्या है मास्टर प्लान.
इंदौर के रैट बाइट हॉट स्पॉट
भंवरकुआ क्षेत्र के भोलाराम उस्ताद मार्ग, विष्णुपुरी और इंद्रपुरी कॉलोनी
बंगाली चौराहा, छत्रीपुरा मल्हारगंज, परदेशीपुरा,पालदा, भागीरथपुरा, पाटनीपुरा,कुशवाह नगर, स्कीम 51,छोटी ग्वालटोली, रीगल चौराहा और इंदौर का एमवाय हॉस्पिटल
हर महीने रैट बाइट के आंकड़े जो शहर के सरकारी हुकुमचंद पॉली क्लिनिक सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड में दर्ज है
जनवरी — 30
फरवरी — 38
मार्च — 55
अप्रैल — 35
मई — 63
जून — 108
जुलाई — 234
अगस्त — 171
सितंबर — 211
अक्टूबर — 178
नवम्बर — 128
वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट अजय दुबे के मुताबिक ठंड से बचने के लिए गर्म स्थान को ढूंढने के लिए चूहे घरों के कमरों तक पहुंच जाते हैं. ये सबसे बड़ी वजह यह है और दूसरा ठंड में शादियों का सीजन शुरू हो जाता है खाने पीने की सुगंध के वजह से भी चूहे अपने बिल से बाहर आते हैं यह दो बड़ी वजह है जिसके वजह से ठंड में चूहों के काटने के मामले बढ़ जाते हैं.