शंकर गार्डन बूथ पर समीर खान के परिवार के तीन सदस्यों के नाम मिल गए, लेकिन उनका नाम सूची में नहीं है। बीएलओ ने कहा कि रिकॉर्ड ऑनलाइन हो चुका है, पर ऑनलाइन भी समीर का नाम नहीं है। यह समस्या सिर्फ समीर की नहीं है। कई परिवार ऐसे हैं, जिनके सदस्यों के ना
.
गौतम नगर की शालिनी वर्मा की दिक्कत और जटिल है। वे 2003 तक यूपी में थीं, शादी के बाद भोपाल आईं और 2014 से नरेला में वोटर हैं। माता-पिता का निधन हो चुका है। उन्हें याद नहीं कि यूपी में किस बूथ पर वोट था। ऐसी समस्याएं रविवार को शहरभर के बूथों पर लगे शिविरों में बड़ी संख्या में सामने आईं। कहीं पत्नी और बच्चों के नाम मिल रहे हैं, तो कहीं परिवार के मुखिया का रिकॉर्ड नहीं है।
अब तक 99 हजार ऐसे वोटर मिले हैं जिनके परिवार का कोई न कोई सदस्य सूची में नहीं है। रविवार को शिविरों में भीड़ शनिवार के मुकाबले 5 से 6 गुना अधिक रही। शनिवार को जहां 10 से 15 लोग पहुंचे थे, वहीं रविवार को संख्या 50 से ज्यादा रही और बड़ी संख्या में फॉर्म भरे गए।
बीएलओ की नई मुश्किल: घर पर वोटर नहीं तो पंचानामा बनाएं
इधर, बीएलओ के सामने नई समस्या आ गई है। अगर कोई घर पर नहीं मिलता है, तो उसके लिए बीएलओ को पंचनामा बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें घर के आसपास के 5 लोगों के साइन कराना होगा। बीएलओ का कहना है कि लोग खुद के फॉर्म पर साइन नहीं कर रहे, उनसे पंचनामा पर कहां साइन कराएं।
कई लोगों ने गलत फॉर्म भरकर दिए हैं, लेकिन फोन करने पर पोलिंग बूथ पर नहीं आ रहे हैं। कई लोगों के प्रोफाइल मैच नहीं कर रहे हैं। कई का निधन हो चुका है। कई बीएलओ टेक्नो फ्रेंडली नहीं है। ऐसे में वे अपने बच्चों और परिवार के सदस्यों की मदद ले रहे हैं।
लक्ष्य से अभी 36 फीसदी पीछे भोपाल ने 30 नवंबर तक 100 फीसदी फॉर्म डिजिटल करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन रविवार शाम 6 बजे तक सिर्फ 64 फीसदी फॉर्म ही डिजिटल हो सके थे। शहर के 21 लाख एसआईआर फॉर्म से अब तक 13 लाख 70 हजार के फॉर्म डिजिटल हो चुके हैं।
चार दिन के शिविर में बढ़ा काम लगातार पोलिंग बूथों पर शिविर लगने का ही असर है कि चार दिन में करीब सवा तीन लाख फॉर्म डिजिटल हो गए। लक्ष्य के अंतिम दिन 30 नवंबर की शाम 6 बजे तक कुल 13 हजार 70 हजार 636 फॉर्म डिजिटल हो चुके थे। यह कुल वोटर का 64.47% है।