ठंड में पाले से फसलों को भारी नुकसान का खतरा, बचाव के लिए अपनाएं ये तरीका

ठंड में पाले से फसलों को भारी नुकसान का खतरा, बचाव के लिए अपनाएं ये तरीका


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Agriculture Tips: कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर के एस यादव बताते हैं कि सागर में दिसंबर महीने के अंत में या फरवरी महीने की शुरुआत में सबसे अधिक पाला पड़ने की संभावना होती है. जब पाला पड़ता है तो उसके लिए जो ओस की बूंद होती है.पेड़ों का पानी होता है.

नवंबर के महीने में सर्दियों ने सागर में 59 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा है लेकिन अब दिसंबर की शुरुआत सही ठंड ने अपने तेवर दिखाना शुरू कर दिए हैं लेकिन इस महीने में मौसम वैज्ञानिको कड़ाके की ठंड होने का अनुमान लगाया है. इस ठंड में इंसान पशु पक्षी और फसलों पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है, शीतलहर चलने की वजह से एक तरफ जहां इंसानों के लिए सतर्क रहने सावधान रहने की स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की गई है.

दूसरी तरफ किसानों के लिए भी कृषि वैज्ञानिकों के द्वारा अपनी फसल को सुरक्षित करने की सलाह दी गई है. इस मौसम में कभी भी पाला लग जाता है जिससे फसल झुलस जाती है. किसान बर्बाद हो जाता है. जो किसान सब्जियों की खेती कर रहे हैं चना मसूर मटर की खेती कर रहे हैं. उन्हें किस तरह की सावधानी रखनी चाहिए. कौन-कौन से छोटे-छोटे से उपाय अपना कर वह अपनी फसल को इस मौसम के बुरे प्रभाव से बचा सकते हैं आज हम जानने की कोशिश करेंगे.

ठंड से फसलों पर पाला पड़ने की संभावना
सागर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर के एस यादव बताते हैं कि सागर में दिसंबर महीने के अंत में या फरवरी महीने की शुरुआत में सबसे अधिक पाला पड़ने की संभावना होती है. जब पाला पड़ता है तो उसके लिए जो ओस की बूंद होती है.पेड़ों का पानी होता है. तापमान कम होने पर बर्फ के रूप में परिवर्तित हो जाता है. जिससे पौधे की कोशिकाएं फट जाती है जिसकी वजह से फसल को नुकसान होता है. फसल को पाला से बचने के लिए किसान भाई ध्यान रखें कि हमारे खेत की जो मेड़ होती है. वहां पर जो कूड़ा कचरा या चारा है.उसको गिला करके जलाएं इससे धुआं निकलता है.उसे तापमान बढ़ जाता है शाम के समय ऐसा करने से पाला असर ज्यादा नहीं होता है.

चना मसूर मटर की खेती
दूसरा किसान भाई अगर आपकी फसल में स्प्रिंकलर से या सीधा पाइप के माध्यम से खेत की सिंचाई कर देते हैं तो इसे अंदर का तापमान गर्म हो जाता है . फिर पाला का असर नहीं होता है. इसमें सब्जी छोटी पौधों और चना मसूर की फसल का बचाव होता है. कृषि वैज्ञानिक के अनुसार जब तापमान अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंच जाता है. सामान्य से काफी कम हो जाता है. उस स्थिति में पाला लगने की संभावना होती है, मौसम विभाग के द्वारा इसका पूर्वानुमान जारी किए जाते हैं या कृषि वैज्ञानिकों के द्वारा भी इसकी जानकारी दी जाती है. इस चीज की जानकारी लगते ही किसान सावधान हो.

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