हरदा में मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान सनाढ्य ब्राह्मण समाज के सदस्यों ने 100 साल पुरानी काशीबाई कन्या पाठशाला बंद होने का विरोध किया। समाज ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर संस्थान को फिर से शुरू करने की मांग की है।
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समाज के सदस्य और रिटायर्ड शिक्षक अनिल अग्निहोत्री ने बताया कि वर्ष 1924 में सनाढ्य ब्राह्मण समाज की दिवंगत काशीबाई ने बालिकाओं की शिक्षा के लिए भवन निर्माण के लिए 5 हजार रुपए और संचालन के लिए 4 हजार रुपए, कुल 9 हजार रुपए दान दिए थे। इसका 7 नवंबर 1924 को पंजीयन भी किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना था।
स्कूल को खेड़ीपुरा माध्यमिक शाला में मर्ज किया
इस संस्थान में सालों से कन्या स्कूल का संचालन हो रहा था। बाद में तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर यहां सेंट्रल स्कूल भी संचालित किया जाने लगा। हाल ही में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस स्कूल को खेड़ीपुरा माध्यमिक शाला में मर्ज कर दिया और संस्थान का डाइस कोड भी बंद कर दिया।
समाज का आरोप है कि यह दानदाता के साथ धोखा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि दानदाताओं के नाम से संचालित संस्थाओं के नाम न तो बंद किए जाएं और न ही बदले जाएं।
सनाढ्य ब्राह्मण समाज ने मांग की है कि इस मामले में जल्द उचित कार्रवाई कर पुराने भवन में स्कूल फिर से शुरू किया जाए। वैकल्पिक रूप से भवन को सनाढ्य ब्राह्मण समाज को सौंपा जाए, ताकि एक नई समिति बनाकर स्कूल का संचालन किया जा सके।
डीईओ बोले- शासन के निर्देश पर की गई कार्रवाई
जिला शिक्षा अधिकारी डी.एस. रघुवंशी ने बताया कि शासन के निर्देश पर ‘एक शाला एक परिसर’ योजना के तहत काशीबाई कन्या शाला को खेड़ीपुरा स्कूल में मर्ज किया गया है। चूंकि यहां सेंट्रल स्कूल संचालित हो रहा था, इसलिए कन्या शाला को मिडिल स्कूल में ट्रांसफर किया गया था। शासन से मिले निर्देशों के आधार पर ही कार्रवाई की गई है।
वहीं, एडीएम पुरुषोत्तम कुमार ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दान में मिले भवन के नियमों और शर्तों का अध्ययन कर उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।