छिंदवाड़ा. पूर्व सांसद नकुलनाथ ने “किसान बचाओ आंदोलन” के दौरान कहा कि किसान अपना हक मांग रहा है, लेकिन किसानों को फसल का सही दाम नहीं मिल रहा है. मंडी में मक्का 900–1500 रुपये क्विंटल बिक रहा है, जबकि केंद्र ने 2400 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य (MSP) की घोषणा की थी. जिले की कुसमेली कृषि उपज मंडी के सामने जुटे किसानों के बीच पहुंचे नकुलनाथ ने कहा कि किसानों को सही कीमत मिलना चाहिए. अभी हालात ऐसे हैं कि उनकी सुनवाई तक नहीं हो रही है.
फसल बेचने के बाद परिवार का खर्च भी नहीं निकल पा रहा
कृषि उपज मंडी में किसानों का कहना है कि खेत में लागत, बीज, खाद, मजदूरी आदि मिलाकर हर एकड़ की लागत काफी बढ़ चुकी है. लेकिन उन्हें मंडी में रखा दाम उस लागत का आधा भी नहीं देता. यह मजबूरी किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए मजबूर करती है वह भी न्यूनतम दाम पर. किसान राजेश विश्वकर्मा ने कहा कि मक्का की फसल बेचने के बाद परिवार का खर्च भी नहीं निकल पा रहा. समर्थन मूल्य की घोषणाएं होती हैं, लेकिन मंडी में धरातल अलग है. उन्होंने कहा “केंद्र 2400 कहे, लेकिन मंडी बोली 900 दे रही है, ये किसान के साथ खुली ठगी है.”
पूर्व सांसद नकुलनाथ ने कहा कि केंद्र सरकार ने 2400 रुपये क्विंटल समर्थन मूल्य घोषित किया था. उन्होंने प्रश्न किया कि भाजपा कब वास्तविक खरीदी शुरू करेगी. किसानों का कहना है कि मंडी में दाम 900–1500 रुपये है. नकुलनाथ ने मांग की कि सरकार तुरंत MSP पर खरीदी शुरू करे, और मक्का का न्यूनतम दाम 3000 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए.
नकुलनाथ ने अपने भाषण में कहा कि जब मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी तो सबसे पहले किसानों का कर्ज माफ करना शुरू किया था. कमलनाथ की सरकार के दौरान छिंदवाड़ा में कॉर्न फेस्टिवल भी आयोजित किया गया था और छिंदवाड़ा को कॉर्न सिटी का तमगा दिया गया था. उस समय मक्के के दाम 2500 रुपए क्विंटल हुआ करते थे. अब हालात बदल गए हैं और महंगाई हर चीज में बढ़ रही है लेकिन किसानों की उपज के दाम कम हो रहे हैं.