सागर: 50 साल पुराना लेबर कोर्ट खत्म, भोपाल-जबलपुर के लगाने पड़ेंगे चक्कर, मुआवजा फंसा, हजारों मजदूर हताश

सागर: 50 साल पुराना लेबर कोर्ट खत्म, भोपाल-जबलपुर के लगाने पड़ेंगे चक्कर, मुआवजा फंसा, हजारों मजदूर हताश


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Sagar Labour Court: सागर श्रम न्यायालय को बंद कर दिया गया है. बड़ी संख्या में यहां मजदूरों के केस चल रहे थे, जिनकी सुनवाई रोक दी गई. लाखों का मुआवजा फंस गया. मजदूर अब परेशान हैं. जानें माजरा…

Sagar News: नाम रोहित कोरी, काम बिजली विभाग में आउटसोर्स कर्मचारी, एक दिन ऑपरेटर की लापरवाही से उन्हें करंट लगा, जिसमें एक हाथ कट कर अलग हो गया. उनके घर में पत्नी और तीन छोटी-छोटी मासूम बच्चे हैं. उनके भरण पोषण की जिम्मेदारी रोहित पर है. हादसा होने के बाद कंपनी ने मुंह फेर लिया तो वह कोर्ट की शरण में आ गए. लेबर कोर्ट में सुनवाई हुई. उनके लिए करीब 11 लाख रुपये का क्लेम मिलना तय हुआ. रकम उनको मिलने ही वाली थी कि श्रम न्यायालय ही बंद हो गया. ऐसे में पुराने मामलों की सुनवाई रोक दी गई. नए मामले लेने से इनकार कर दिया गया.

इसमें रोहित जैसे तमाम लोगों को भविष्य फिर अंधकार में दिखाई देने लगा. 21 नवंबर को आए एक आदेश के बाद न्याय की उम्मीद में बैठे पीड़ित मजदूर हताश हैं. दरअसल, सागर जिला मुख्यालय पर 50 साल से अधिक पुराना लेबर कोर्ट है. यहां सागर संभाग के 6 जिलों के ऐसे मजदूर कर्मचारी जिनके साथ दुर्घटना हुई है और उन्हें अपना हक नहीं मिल रहा तो वे लेबर कोर्ट के माध्यम से ही अपनी लड़ाई लड़ते हैं. सागर श्रम न्यायालय में ही इस तरह के करीब 800 मामले अभी पेंडिंग हैं, जिसमें करीब 20 करोड़ रुपए मजदूरों के फंसे हैं. क्योंकि, 21 नवंबर से लेबर कोर्ट को खत्म कर दिया गया है.

कार्रवाई रोका जाना गलत
सागर एडवोकेट लेबर संगठन के सचिव पैट्रिस फुसकेले ने बताया, श्रम कानून को लेकर अभी 29 कानून थे. उनको खत्म करके चार संहिताओं में संहिताबद्ध कर दिया गया है. इसकी वजह से श्रम न्यायालय में चल रही मामलों की सुनवाई रोक दी गई है, जबकि इसको लेकर अभी राज्यों में कोई नियम नहीं बने हैं. ऐसे में श्रम न्यायालय की कार्रवाई को रोका जाना गलत है. इसकी वजह से पक्षकर परेशान हो रहे हैं. हम लोगों की मांग है कि जब तक नियम नहीं बन जाते, तब तक इस कार्रवाई को नहीं रोका जाना चाहिए.

तो जाना पड़ेगा भोपाल, जबलपुर
आगे बताया, साथ ही जो प्रदेश में श्रम न्यायाधिकरण स्थापित किया जा रहा है, वह बुंदेलखंड में भी होना चाहिए. नहीं तो यहां के मजदूर कहां जाएंगे? अगर यहां न्यायाधिकरण नहीं बना तो लेबर को भोपाल या जबलपुर जाना पड़ेगा.

पहले मोहलत देते…
लेबर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वीएन सरवटे ने बताया, अगर केंद्र सरकार इसको खत्म करना चाह रही थी तो पहले कुछ मोहलत देनी चाहिए थे. ताकि जो पेंडिंग मामले हैंख् उनको पूरा किया जाता. साथ ही राज्य के जब नियम बन जाते तब इसको खत्म किया जाता.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

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सागर: 50 साल पुराना लेबर कोर्ट खत्म, अब यहां जाना पड़ेगा, मुआवजा भी फंसा



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