सिर्फ 50 दिनों में हो जाएंगे लाखों के मालिक! दिसंबर में इस खास तरीके से करें मूली की खेती, हो जाएंगे मालामाल

सिर्फ 50 दिनों में हो जाएंगे लाखों के मालिक! दिसंबर में इस खास तरीके से करें मूली की खेती, हो जाएंगे मालामाल


Radish Farming Tips: दिसंबर का महीना किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. इस समय रबी सीजन की ज़्यादातर फसलों की बुआई का काम तेज़ी से चल रहा होता है. ऐसे में अगर किसान कुछ ऐसी फसलों का चुनाव करें, जिनमें खर्च कम आए, समय भी कम लगे और दाम भी अच्छे मिलें, तो खेती और भी फायदेमंद बन सकती है. इन्हीं फसलों में एक है—मूली, जो इन दिनों किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है.

मूली की खासियत यह है कि इसकी खेती आसान है, दवाइयों का खर्च बहुत कम आता है, और 45 से 50 दिन में फसल तैयार हो जाती है. सबसे बड़ी बात यह है कि सर्दियों में मूली की मांग हमेशा बनी रहती है. लोग सलाद, पराठे, सब्जी, अचार—हर रूप में मूली का इस्तेमाल करते हैं. यही वजह है कि इस समय मंडियों में मूली का रेट लगातार बढ़ा हुआ है.

निमाड़ क्षेत्र में भी अब मूली की खेती बढ़ने लगी है. पहले जहां किसान सिर्फ गेहूं, चना और पारंपरिक फसलों पर ध्यान देते थे, वहीं अब मूली जैसी जल्दी तैयार होने वाली फसलों की तरफ भी रुख कर रहे हैं, क्योंकि इससे जल्दी आमदनी मिल जाती है.

जय कृषि किसान क्लीनिक के विशेषज्ञ नवनीत रेवापाटी बताते हैं कि इस समय एक मूली किसान को 10 रुपए प्रति नग के हिसाब से बिक रही है. यानी अगर किसान सिर्फ एक बीघा में मूली लगाता है, तो उसे कुछ ही हफ्तों में अच्छी कमाई हो सकती है. उनके अनुसार मूली ऐसी फसल है जिसमें अधिक कीटनाशक की जरूरत नहीं पड़ती. यह जमीन के भीतर उगती है, जिस कारण इसका नुकसान भी कम होता है.

सही जमीन का होना जरूरी
मूली की खेती के लिए ज्यादा भारी-भरकम या बहुत चिपचिपी मिट्टी की जरूरत नहीं होती. बस जमीन भुरभुरी, हल्की और पानी निकालने लायक होनी चाहिए. अगर खेत की मिट्टी थोड़ी भी ठीक-ठाक है, तो मूली आराम से तैयार हो जाती है. किसान जुताई के बाद मिट्टी को अच्छे से भुरभुरा कर लें ताकि मूली सीधी और लंबी बने.

इन दिनों हाइब्रिड वैरायटी दे रही हैं ज़्यादा उत्पादन
नवनीत रेवापाटी बताते हैं कि अब बाजार में कई ऐसी हाइब्रिड वैरायटी आ गई हैं जो बहुत जल्दी तैयार हो जाती हैं. कई किस्में तो 35–40 दिन में भी बाजार के लायक आकार दे देती हैं. इससे किसान एक सीजन में 2–3 बार भी फसल ले सकते हैं.

बीज बोने से पहले तैयारी
पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से
दो–तीन जुताई कल्टीवेटर से
खेत में 8–10 टन गोबर की खाद
लाइनों की दूरी 30 सेमी
बीजों की दूरी 5–7 सेमीअगर शुरुआत सही हो जाए तो मूली का आकार भी अच्छा आता है और बाजार में भी बढ़िया दाम मिल जाते हैं.

सिंचाई का ध्यान
मूली में ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती, लेकिन नमी बनी रहनी चाहिए.
बीज बोने के बाद हल्की सिंचाई
उसके बाद 5–7 दिन के अंतर पर
पानी कभी खेत में खड़ा नहीं होना चाहिएखेत में पानी खड़े रहने से मूली टेढ़ी-मेढ़ी बन जाती है.

रोग और कीट कम
मूली की सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें दवाइयों का खर्च लगभग न के बराबर आता है.चूंकि यह जमीन के नीचे बढ़ती है, इसलिए ऊपर वाले कीट लगने की संभावना बहुत कम होती है. बस ध्यान रखें कि मिट्टी में ज्यादा नमी न हो, वरना जड़ गलने की समस्या हो सकती है.

तैयार फसल में अच्छी कमाई
मूली की फसल जब 45–50 दिन की हो जाती है, तो इसे आसानी से बाजार में बेचा जा सकता है.नवनीत रेवापाटी बताते हैं कि इस समय किसानों को 10 रुपए प्रति नग के हिसाब से दाम मिल रहे हैं. एक छोटे खेत में भी हजारों मूली निकल आती हैं, इसलिए मुनाफा खुद-ब-खुद बढ़ जाता है.

किसानों के लिए खास सलाह
दिसंबर में मूली की खेती का समय बिल्कुल सही
खर्च कम, मेहनत कम और कमाई ज्यादा
बाजार में मांग हमेशा उच्च
जल्दी तैयार होने वाली हाइब्रिड किस्में ज्यादा फायदेमंद
खेत थोड़ा भी ठीक हो तो फसल अच्छी बनती है

अंत में यही कहा जा सकता है कि अगर किसान दिसंबर में मूली की खेती शुरू करते हैं, तो सिर्फ 50 दिन में बढ़िया आमदनी उनकी जेब में होगी.यह फसल कम लागत, कम समय और ज्यादा मुनाफे का सबसे आसान तरीका साबित हो सकती है.



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