MP में बाल विवाह का बढ़ा खतरा! 5 साल में 366 से 538 पहुँचे मामले, विधानसभा में खुलासा

MP में बाल विवाह का बढ़ा खतरा! 5 साल में 366 से 538 पहुँचे मामले, विधानसभा में खुलासा


भोपाल. मध्यप्रदेश में बाल विवाह के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. विधानसभा में सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों से पता चला कि वर्ष 2020 में जहां बाल विवाह के 366 मामले सामने आए थे, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 538 हो गई. ये सभी मामले ऐसे थे जिनमें लड़कियों की उम्र 18 वर्ष से कम पाई गई.

कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने विधानसभा में प्रश्न पूछा था कि मार्च 2020 से अब तक मध्यप्रदेश में कितने बाल विवाह के मामले सामने आए हैं, जिसमें लड़की नाबालिग थी. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार वर्षवार और जिला-वार आंकड़े प्रस्तुत करे. इसके साथ ही उन्होंने यह जानकारी भी मांगी कि बाल विवाह रोकने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं और इस दौरान अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है. यह जानकारी भी जिला-वार देने को कहा गया.

महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने उत्तर में बताया कि प्रदेश में बाल विवाह रोकथाम अधिकारियों की नियुक्ति की गई है. “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान के तहत हर महीने योजनाबद्ध तरीके से जागरूकता गतिविधियां चलाई जाती हैं. अक्षय तृतीया और देव उठनी एकादशी जैसे अवसरों पर विशेष प्रचार अभियान चलाए जाते हैं. इनमें जनअपील जारी करना, कार्यशालाएं, रैलियां, नुक्कड़ नाटक, तथा बच्चों के साथ संवाद कार्यक्रम (बाल चौपाल) शामिल होते हैं.

MP में 6 सालों में 2916 बाल विवाह

2025: नवंबर तक कुल 538 मामले, सबसे ज्यादा दमोह में (115)

2024: कुल 529 मामले, सबसे ज्यादा डिंडोरी में (39)

2023: कुल 528 मामले, सबसे ज्यादा राजगढ़ में (87)

2022: कुल 519 मामले, सबसे ज्यादा दमोह में (64)

2021: कुल 436 मामले, सबसे ज्यादा दमोह में (69)

मंत्री ने बताया कि बाल विवाह रोकने के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर विशेष टीमें बनाई गई हैं. साथ ही सूचना समूह, फ्लाइंग स्क्वॉड, कंट्रोल रूम और मॉनिटरिंग यूनिट भी स्थापित किए गए हैं ताकि किसी भी बाल विवाह की जानकारी मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके. कांग्रेस विधायक ने यह भी पूछा कि पिछले पाँच वर्षों में कितनी नाबालिग लड़कियों ने बच्चों को जन्म दिया और उनमें से कितने नवजात बच्चों की मृत्यु हुई. लेकिन सरकार इस प्रश्न का उत्तर नहीं दे सकी और इस संबंध में कोई जानकारी प्रस्तुत नहीं की.

देशभर की स्थिति को देखते हुए मंत्री ने बताया कि वर्ष 2024-25 में पूरे भारत में 1,351 बाल विवाह रोके गए और लगभग 1.2 लाख मामले समय रहते रोक दिए गए. यह सफलता एफआईआर दर्ज होने, गिरफ्तारी, तथा लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों के कारण मिली. हालांकि गरीबी, सामाजिक परंपराएं और जागरूकता की कमी जैसी चुनौतियाँ अब भी मौजूद हैं, जिससे बाल विवाह पूरी तरह खत्म करने के प्रयासों को कठिन बनाती हैं. इस तरह विधानसभा में हुई चर्चा से साफ हुआ कि मध्यप्रदेश में बाल विवाह की समस्या अभी भी गंभीर है और इसे रोकने के लिए और अधिक प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है.



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