पिता करते मजदूरी, घर में थे खाने के लाले, बेटी ने गोल्ड मेडल जीतकर रचा इतिहास

पिता करते मजदूरी, घर में थे खाने के लाले, बेटी ने गोल्ड मेडल जीतकर रचा इतिहास


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Mallakhamb National Championship: पिता मजदूरी करते, घर में खाने के लाले पड़े रहते, किराए के पैसे नहीं, शिक्षकों ने मदद से इनकार कर दिया उसने कमाल कर दिया है. वह ऐसे खेल में जिस खेल का लोग नाम भूलते जा रहे हैं उस खेल में यह न सिर्फ पारंगत है, बल्कि राष्ट्रीय प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया.

अनुज गौतम, सागर: कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता. एक पत्थर को तबीयत से उछालो यारो यह कहावत सागर की एक 14 साल की लड़की पर चरितार्थ होती है क्योंकि जिसके पिता मजदूरी करते, घर में खाने के लाले पड़े रहते, किराए के पैसे नहीं, शिक्षकों ने मदद से इनकार कर दिया उसने कमाल कर दिया है वह ऐसे खेल में जिस खेल का लोग नाम भूलते जा रहे हैं उस खेल में यह न सिर्फ पारंगत है बल्कि राष्ट्रीय प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है उसने इस प्रतियोगिता में देश भर के खिलाड़ियों में प्रथम स्थान प्राप्त किया. इस गोल्ड मेडल के साथ ही इस बिटिया ने अपने परिवार के साथ जिले का नाम भी रोशन किया है.

सागर जिले से 70 किलोमीटर दूर स्थित शाहगढ़ की बेटी रुचि पाल ने कठिन परिस्थितियों से गुजरते हुए अपने संघर्ष और परिश्रम की बदौलत यह मुकाम हासिल किया है क्योंकि वह जिस परिवार से बिलॉन्ग करती है उसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है. इसका अंदाजा आप ऐसे लगा सकते हैं कि राष्ट्रीय प्रतियोगिता में चयन होने के बाद भी सागर से उज्जैन जाने के लिए उसके पास किराए के पैसे नहीं थे जिस स्कूल में पढ़ती है वहां टीचरों से भी इस संबंध में बात की लेकिन सभी ने हाथ खड़े कर लिए तब वह निराश और उदास हो गई लेकिन रुचि के कोच मोहित भल्ला का दिल प्रसिद्ध गया और उन्होंने अपनी इस खिलाड़ी को प्रोत्साहित करने के लिए उसके पिता से बात की दोनों के आने-जाने का खर्च दिया और प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए भेज दिया.

देश भर के खिलाड़ियों में प्रथम स्थान प्राप्त किया
इस प्रतियोगिता में रुचि पाल ने मलखंब पर ऐसे करतब दिखाये की देखने वाले अपने दांतों तले उंगलियां दबाते रह गए. हर कोई इस बेटी की कला को देखकर हैरान था 25 में से 24.30 अंक अर्जित करके रुचि ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया. रुचि जब गोल्ड मेडल जीतकर अपने गांव वापस लौटी तो सभी का सर गर्व से ऊंचा है खासकर जिन लोगों ने उसकी मदद करने से साफ इनकार कर दिया था. आज वही माला लेकर उसके स्वागत में खड़े नजर आते हैं और अब अपने स्कूल की होनहार छात्र है कहते हुए नहीं थक रहे हैं.

आठ भाई बहनों में रुचि छठवें नंबर की
जिस बिटिया ने यह गोल्ड मेडल जीता है वह आठ भाई बहन है और कमाने के लिए केवल पिता है जो मजदूरी करके बड़ी मुश्किल से घर का भरण पोषण कर पा रहे हैं रुचि छठवें नंबर की बेटी है जिसने अपने पिता का नाम रोशन किया है अब वह इंटरनेशनल खेलने के साथ ही पुलिस में जाने की भी तैयारी कर रही है.

दशहरा में मलखान में देखकर जगी थी रुचि की रुचि
सरकारी स्कूल से पढ़ाई करने वाली रुचि पाल बताती हैं कि 5 साल पहले दशहरा के दिन उन्होंने अपने बाजार में मलखंब होते हुए देखा था. इसके बाद इसे करने को लेकर उनकी जिज्ञासा जागी पता किया तो गांव की एक स्कूल अभिनव विद्या मंदिर में से सिखाया जाता था उन्होंने कोच से बात की अपनी आरती की स्थिति बताई इसके बाद उन्होंने और सही निशुल्क कोचिंग देकर मलखा में निपुण बना दिया पहले जिला खेल फिर संभाग और स्टेट के बाद नेशनल में गोल्ड मेडल जीता है.

बेटियों को सेल्फ डिफेंस सिखा रहे मोहित भल्ला

दुर्गा शक्ति व्यायाम शाला के मोहित भल्ला बताते हैं कि वह अपनी स्कूल में केवल बेटियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग देते हैं. जिसमें उन्हें लाठी चलाना तलवार चलाना भला चलाना मलखंब सीखना आदि चीजों में पारंगत कर रहे हैं. इस समय हमारे स्कूल में 65 बेटियां हैं और हम चाहते हैं कि सभी नेशनल और इंटरनेशनल खेल कर नाम रोशन करें. उज्जैन में 69 भी राष्ट्रीय शालेय मलखंभ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था, 24 नवंबर से 28 नवंबर तक विभिन्न प्रतियोगिताएं हुई थी.

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shweta singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

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