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वर्रो वाले बाबा में आचार्य गुरुदेव की ऊर्जा विराजमान है। यह बात निर्यापक श्रमण मुनि श्री संभव सागर महाराज ने शुक्रवार सुबह धर्मसभा में कही। उन्होंने कहा कि शीतलधाम में भगवान आदिनाथ स्वामी की जो प्रतिमा है, वह हजारों साल पुरानी है। उस प्रतिमा में उन्होंने खुद ऊर्जा महसूस की है। उन्होंने कहा कि उसमें आचार्य गुरुदेव की ऊर्जा है। यह प्रतिमा अब नए मंदिर में विराजमान की जाएगी। इसके लिए पूरे विदिशा और बुंदेलखंड को मिलकर तैयारी करनी होगी।
मुनि श्री ने कहा कि जैसे कुंडलपुर में बड़े बाबा को उच्चासन पर विराजमान किया गया था, वैसे ही विदिशा में भी शीतलधाम महोत्सव मनाया जाएगा। इसके लिए पूरे भारत से श्रद्धालुओं को आमंत्रित करें। उन्होंने कहा कि अभी डेढ़ माह का समय है। ऐसी भक्ति करें कि पूस की सर्दी भी भक्ति की गर्मी से दूर हो जाए।
उन्होंने कहा कि आचार्य गुरुदेव समयसागर महाराज जबलपुर के तिलवारा घाट में विराजमान हैं। समाज और शीतलधाम के प्रतिनिधि उनसे निवेदन करने जबलपुर जा रहे हैं कि वे बर्रो वाले बाबा की अगवानी करें। मुनि श्री ने कहा कि जब पहले बर्रो वाले बाबा विदिशा आए थे, तब उनकी मंगल अगवानी आचार्य गुरुदेव विद्यासागर महाराज ने की थी। अब नए मंदिर में भी वही परंपरा दोहराई जाए। उन्होंने कहा कि प्रतिमा में इतनी ऊर्जा है कि वह पूरे क्षेत्र को प्रभावित करेगी। उन्होंने सभी से कहा कि इस आयोजन को वृहद रूप देने के लिए अभी से तैयारी करें।