भिंड के गोहद क्षेत्र में नेशनल हाईवे-719 पर 30 नवंबर की रात डांग गांव के दिलीप सिंह का पुरा में गौरव गुर्जर की कार सवारों ने गोली मारकर हत्या कर दी। 26 साल के युवक की हत्या में कैबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला के समधी जेपी कांकर समेत तीन लोगों पर पुल
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हत्या में शामिल तीनों के खिलाफ पहले भी कई मामले दर्ज हो चुके हैं। कांकर का नाम तो गुंडा लिस्ट तक में शामिल रहा, उन पर रासुका तक की कार्रवाई हुई। एक आरोपी तो नाबालिग युवक के अपहरण और हत्या तक में शामिल रहा था।
दैनिक भास्कर ने इस पूरे घटनाक्रम को समझने के साथ ही आरोपियों की क्राइम हिस्ट्री की पड़ताल की, जिसमें मंत्री के समधी पर ही 13 केस दर्ज होना पाए गए। पढ़िए रिपोर्ट…. सबसे पहले जानिए, क्यों हुई गौरव गुर्जर की हत्या
बंदूक निकाली और गौरव को गोली मार दी
रविवार रात मंत्री शुक्ला के समधी जेपी कांकर अपने दो साथियों सुनील कांकर व दीपू बोहरे के साथ कार से भिंड से ग्वालियर की ओर जा रहे थे। रास्ते में तीनों ने शराब पी और ढाबे पर खाना खाया। थोड़ा आगे उन्होंने कार रोकी और हाईवे किनारे खड़े हो गए।
गौरव के चचेरे भाई राहुल गुर्जर ने पुलिस को बताया कि चाचा सुरेश की बेटी यानी मेरी चचेरी बहन की शादी थी। चाचा और हमारा घर हाईवे पर आमने-सामने है। रात करीब सवा 9 बजे मैं, पापा मुन्ना सिंह गर्जर, ताऊ के बेटे कपिल गुर्जर व गौरव गुर्जर साथ शादी में जाने के लिए घर से निकले। हमने हाईवे क्रॉस कर किया, तभी रोड किनारे एक सफेद रंग की कार खड़ी दिखी। जेपी कांकर निवासी अटेर रोड भिंड अपने अन्य दो साथियों के साथ खड़े होकर बाथरूम कर रहा था। वे लोग जमकर गाली-गलौज कर रहे थे।
भाई गौरव गुर्जर ने उन्हें टोकते हुए जेपी कांकर से कहा- यहां शादी का कार्यक्रम चल रहा है। आप लोग गाली-गलौज क्यों कर रहे हो? इसी बात को लेकर जेपी कांकर व उसके अन्य दो साथी आक्रोशित हो गए। वे हाथापाई करने लगे। विवाद बढ़ा तो जेपी कांकर ने पास खड़ी कार से बंदूक निकाली और भाई गौरव को गोली मार दी। गोली लगते ही गौरव जमीन पर गिर पड़ा।
मंत्री के समधी जेपी कांकर अपनी कार में सवार होकर दोनों साथियों के साथ मौके से भाग निकले। इधर, गौरव गुर्जर को गोली लगने के बाद तत्काल ग्वालियर लेकर जाया गया, जहां उपचार के दौरान देर रात उसने दम तोड़ दिया।
हत्या में तीन आरोपी शामिल, किस पर कितने केस…

मंत्री के समधी, दो बार हत्या, एक बार रासुका में आरोपी
भास्कर टीम ने जब मंत्री के समधी जेपी कांकर निवासी मुरलीपुरा का आपराधिक रिकॉर्ड खंगाला तो चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया। कांकर पर अब तक 13 अपराध दर्ज हो चुके हैं। इनमें दो बार हत्या, हत्या का प्रयास, रासुका जैसे संगीन अपराध भी शामिल हैं। लोगों से बात की तो कोई भी कैमरे के सामने आने को तैयार नहीं हुआ, लेकिन दबी जुबान में कहा- मंत्री के समधी का रसूख अटेर क्षेत्र के मुरलीपुरा सहित आसपास की पंचायतों में खूब है। इसके अलावा भिंड शहर में भी जेपी कांकर की दबंगई से लोग भली-भांति परिचित हैं।
- आरोपी जेपी कांकर पर 2006 में पहला केस देहात थाने में दर्ज हुआ था। पुलिस ने रास्ता रोकने और बंधक बनाने का केस दर्ज किया था।
- 2007 में कांकर तब चर्चा में आए, जब उनका विवाद अटेर रोड में कुछ दबंगों से हुआ। कांकर ने दबंगों के साथ मारपीट कर जमकर गोली चलाई थी। कांकर को हत्या के प्रयास के मामले में जेल जाना पड़ा था।
- जेल से वापस आने के बाद 2010 में फिर घर में घुसकर मारपीट की। वर्ष 2012 में एक युवक पर गोली चलाई, जिसमें कांकर को आरोपी बनाया गया।
- वर्ष 2013 में पुलिस ने फिर से हत्या के प्रयास में आरोपी बनाया। इसी साल जेपी कांकर पर रासुका भी लगाई गई की। गुंडा लिस्ट में शामिल होने पर कांकर पर जिलाबदर की कार्रवाई भी हो चुकी है।
- वर्ष 2019 में कांकर एक हत्याकांड में आरोपी बने। वर्ष 2020 में मारपीट व एससी-एसटी एक्ट का मुकदमा दर्ज हुआ। वर्ष 2025 में भी गंभीर अपराध में आरोपी बने।
कांकर के दबंगई के दो केस
- केस – 1 मुरलीपुरा गांव में 15 अगस्त 2020 की शाम मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। कमलेश जाटव जहां भैंसें बांधता था, उसने उस जगह बरसात का पानी रोकने के लिए ईंट की छोटी सी दीवार खड़ी कर ली थी। गांव के जयप्रकाश उर्फ जेपी कांकर और बसंत बोहरे वहां पहुंचे और दीवार हटाने को लेकर विवाद शुरू कर दिया। दोनों ने गालियां देते हुए उससे मारपीट की। 50 हजार रुपए मांगे, नहीं तो घर खाली करने की धमकी दी। उन्होंने जान से मारने का कहते हुए सीने पर उसके बंदूक अड़ा दी। डर के कारण पहले तो वह थाने नहीं पहुंचा, बाद में समाजजनों के द्वारा संबल देने पर केस दर्ज करवाया।
- केस – 2 पंकज जाटव ने 1 जनवरी 25 को देहात थाने में केस दर्ज करवाया। पंकज के मुताबिक उसने 7-8 महीने पहले बसंत शर्मा से 10 हजार रुपए उधार लिए थे। कुछ दिनों पहले दोपहर करीब 12 बजे बसंत शर्मा, जेपी और सतीश पंडित उसके घर के बाहर आकर खड़े हो गए। तीनों ने 10 हजार के बदले रुपए मय ब्याज के साथ 1 लाख रुपए लौटाने को कहा। नहीं देने पर प्लाट उनके नाम करने के लिए धमकाया। विरोध किया तो गालियां देते हुए मारपीट की। इसके बाद फरियादी थाने पहुंचा।

गौरव गुर्जर की हत्या के बाद अस्पताल में मौजूद पुलिस और स्थानीय लोग।
सुनील कांकर पर अब तक 7 मामले दर्ज हुए
भिंड शहर के वार्ड-1 एक निवासी सुनील कांकर पर भी हत्या के प्रयास समेत कई धाराओं में केस दर्ज हो चुके हैं। सिटी कोतवाली और देहात थाने में कुल 7 मुकदमे दर्ज हुए हैं, जिनमें तीन मुकदमे 302 व 307 की धाराओं में दर्ज हुए। सुनील तब चर्चा में आया, जब साल 2013 में मारपीट और बंधक बनाने के मामले में उसका नाम सामने आया।

गौरव की मौत के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए ग्रामीणों ने हाईवे जाम कर दिया था।
दीपू का नाम बच्चे के अपहरण और हत्या में सामने आया
गौरव गुर्जर हत्याकांड में तीसरा आरोपी अटेर रोड निवासी दीपू बोहरे है। दीपू का नाम तीन साल पहले चर्चित 11 वर्षीय आर्यन हत्याकांड में आया था। स्कूल संचालक द्वारा बच्चे की हत्या की गई थी, जिसमें दीपू बोहरे पर भी आरोप लगे थे। इस मामले में जिला न्यायालय ने उसे दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी। इसके बाद दीपू को हाईकोर्ट ने जमानत मिली थी। वह कुछ समय पहले ही जेल से बाहर आया था।

आर्यन केस में पुलिस ने 5 लोगों को आरोपी बनाया था, जिसमें दीपू भी शामिल था।
भिंड जिले के इस चर्चित केस को भी जान लीजिए…
भिंड कोतवाली थाना क्षेत्र में नवंबर 2022 में श्रीराम नगर निवासी आर्यन शर्मा पिता धीरेंद्र शर्मा घर से बाहर खेलने के लिए निकला था। उसी दौरान स्कूल संचालक पवन शर्मा ने उसे चॉकलेट का लालच दिया और अपने स्कूल बुलाया। पवन शर्मा पर 15-20 लाख रुपए का कर्ज था और उसने इस कर्ज को चुकाने के लिए आर्यन का अपहरण कर फिरौती मांगने की योजना बनाई थी। हालांकि, उसकी योजना सफल नहीं हो पाई और पवन ने आर्यन का गला दबाकर हत्या कर दी थी। शव को स्कूल की छत से बगल के खाली प्लॉट में फेंक दिया था।
हत्याकांड में पवन शर्मा के साथ पांच अन्य लोग भी शामिल थे। इनमें दीपू (साला), दोस्त शैलेष, रिश्तेदार विश्राम शर्मा, और मधुर कटारे का नाम शामिल था। पुलिस ने घटना के कुछ समय बाद ही इन सभी को गिरफ्तार कर लिया था। सभी के खिलाफ ठोस सबूत और गवाह अदालत में पेश किए गए। मामले की सुनवाई दो साल तक चली और कोर्ट ने मुख्य आरोपी को आजीवन और पांच आरोपियों को साजिश में शामिल होने व साक्ष्य छिपाने पर 7-7 साल की सजा सुनाई।
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