हनुमान अष्टमी का पावन पर्व बेहद खास… आखिर महाकाल की नगरी में ही क्यों मनाया जाता है? जानें अद्भुत रहस्य

हनुमान अष्टमी का पावन पर्व बेहद खास… आखिर महाकाल की नगरी में ही क्यों मनाया जाता है? जानें अद्भुत रहस्य


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Hanuman Ashtami Ujjain: महाकाल की नगरी उज्जैन में धूमधाम से हनुमान अष्ट्मी का पर्व मनाया जाएगा. लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि यह पर्व उज्जैन में ही क्यों मनाया जाता है. आइए उज्जैन के आचार्य से जानते हैं इसके पीछे का रहस्य.

Hanuman Ashtami Ujjain: विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की नगरी जिसे धार्मिक नगरी के नाम से जाना जाता है. यहा कई ऐसे रहस्य छुपे हुए है जो समय-समय पर लोगों के बीच पहुंचते है. 12 दिसम्बर को ऐसा ही पर्व आ रहा है. जो कि हनुमान अष्टमी के नाम से जाना जाएगा. इसके लिए महाकाल की नगरी उज्जैन में हनुमान मंदिर मे कई विशेष तैयारी चल रही है. इस पर्व पीछे भी एक रहस्य है, जो बहुत कम लोग जानते हैं.

पंडित आनंद भारद्वाज के अनुसार पौष मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हनुमान अष्टमी के रूप में मनाया जाता है. महाकाल की नगरी में रूद्र स्वरूप में हनुमानजी विराजमान हैं. खरमास के साथ यह महीना धनु संक्रांति का भी है. साथ ही सूर्य की साधना भी इस महीने में करने का महत्व है. इसी महीने में संयोग से हनुमान अष्टमी भी आती है. यहां पर 108 हनुमान यात्रा का विधान है, जो शक्ति का अंश मानकर की जाती है. इससे मानसिक, शारीरिक कष्ट दूर होते हैं. इस माह में ऋतु परिवर्तन का विधान बताया जाता है. इसमें सूर्य और हनुमानजी की आराधना करने से लाभ मिलता है. अवंतिका में हनुमानजी की चैतन्य मूर्तियों के अनेक स्थान हैं.

महाकाल की नगरी में ही क्यों मनाया जाता है यह पर्व 
पौराणिक मान्यता है कि त्रेतायुग में लंका युद्ध के बाद अहिरावण का वध कर हनुमान जी ने भगवान राम और लक्ष्मण को मुक्त कराया था. इसके बाद, भगवान राम के राज्याभिषेक के लिए सभी तीर्थों से पवित्र जल लाने के दौरान हनुमान जी उज्जैन भी आए थे. कोटि तीर्थ के जल से भरा हुआ उनका घड़ा उठाने में जब उन्हें कठिनाई हुई, तो उन्होंने अपने साथ लाए सभी तीर्थों का जल वहां समर्पित कर दिया, जिससे यह कुंड कोटि तीर्थ कुंड कहलाया. इस घटना की स्मृति में, उज्जैन में हनुमान अष्टमी का विशेष पर्व मनाया जाता है.

अवंतिका की रक्षा के लिए विराजमान है 108 हनुमान
बाबा महाकाल की नगरी में कई ऐसे धार्मिक मंदिर है. जिनकी ख्याति दूर-दूर तक फैली है. उज्जैन की चारो सीमा पर कई ऐसे मंदिर है.जो अवंतिका की नगरी की रक्षा करते है. शहर की चारों दिशाओं की रक्षा करने के लिए हनुमान मंदिरों की स्थापना हुई थी, इसलिए यहां 108 हनुमान मंदिर हैं. स्कंदपुराण के अवंतिका खंड में उल्लेख भी मिलता है. यही वजह है कि हनुमान अष्टमी का पर्व केवल उज्जैन में मनाए जाने की परंपरा रही है. इस बार भी यह पर्व बड़ी ही धूमधाम के साथ मनाया जायगा.

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Deepti Sharma

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हनुमान अष्टमी का पावन पर्व बेहद खास, आखिर उज्जैन में ही क्यों मनाया जाता है?



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