Agri Tips: सागर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर के. एस. यादव बताते हैं कि दिसंबर महीने के अंत में या फरवरी महीने की शुरुआत में सबसे अधिक पाला पड़ने की संभावना होती है. जब पाला पड़ता है तो उसके लिए जो ओस की बूंद होती है.पेड़ों का पानी होता है. तापमान कम होने पर बर्फ के रूप में परिवर्तित हो जाता है. जिससे पौधे की कोशिकाएं फट जाती है जिसकी वजह से फसल को नुकसान होता है. फसल को पाला से बचने के लिए किसान भाई ध्यान रखें कि हमारे खेत की जो मेड़ होती है. वहां पर जो कूड़ा कचरा या चारा है.उसको गिला करके जलाएं इससे धुआं निकलता है.उसे तापमान बढ़ जाता है शाम के समय ऐसा करने से पाला असर ज्यादा नहीं होता है.