7 बेटियों के पिता की मौत, श्मशान तक निभाया बेटे का फर्ज, घर के हालात जान लोगों का बैठा दिल!

7 बेटियों के पिता की मौत, श्मशान तक निभाया बेटे का फर्ज, घर के हालात जान लोगों का बैठा दिल!


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Sagar News: सागर में सात बेटियों के पिता की मौत ने उन तमाम लोगों को दुखी कर दिया, जिन्होंने बेटियों के हालात के बारे में जाना. सात बेटियों और मां के सामने अब खाने-कमाने का संकट खड़ा हो गया है. ऊपर से इलाज के लिए जो…

Sagar News: सागर शहर में उस समय लोगों की आंखें नम हो गईं, जब पिता की अर्थी को बेटियां कंधा देती हुई दिखीं. बेटियां पिता की अर्थी को घर से शमशान घाट तक ले गईं. इतना ही नहीं, उन्होंने हिंदू रीति रिवाज के नियमों का पालन करते हुए चिता को मुखाग्नि भी दी. जिसने भी श्मशान घाट में बेटियों को अंतिम क्रिया करते हुए देखा उसकी आंखें नम हो गईं. बता दें, जिस शख्स की मृत्यु हुई, उनकी 7 बेटियां हैं. बेटा नहीं है. लेकिन, बेटियों ने बेटे का फर्ज निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

बता दें कि राजीव नगर निवासी डालचंद वाल्मीकि कि पिछले रविवार को बुखार आने से तबियत बिगड़ गई थी. उन्हें सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था. जांच होने के बाद पता चला कि उनके गले में छाले हैं. वह तेजी से फैल रहे हैं. जल्द ही इलाज नहीं मिला तो खतरनाक साबित हो सकते हैं. परिवार पैसों का बंदोबस्त करने में लग गया. उन्हें नागपुर इलाज के लिए ले गए. दो-तीन दिन वह वहां भर्ती रहे, लेकिन बचाया नहीं जा सका. रविवार दोपहर में अंतिम संस्कार किया गया.

गहने गिरवी रखे, पर पिता जिंदा नहीं लौटे
डालचंद वाल्मीकि की सबसे बड़ी बेटी साधना ने बताया, रविवार के दिन उनके पिता को बुखार आया था जिसके लिए अस्पताल में भर्ती कराया. लेकिन पता चला की गले में छाले हो गए हैं. मेडिकल कॉलेज से नागपुर रेफर कर दिया गया था. हम लोगों ने घर में जितने पैसे थे और मां के जेवर थे, उनको गिरवी रख के इलाज कराया, लेकिन पिता को जिंदा वापस घर नहीं ला पाए.

पिता की जगह नौकरी मिले तो सहारा होगा
अब हम लोगों के घर में सात बहने हैं, जिसमें सबसे छोटी बहन की उम्र 12 साल है. कुल आठ सदस्य हैं. कमाने वाले अकेले पिता थे. वह 24 साल से नगर निगम में विनियमित तौर पर सफाई कर्मचारी का काम कर रहे थे. उन्हीं की सैलरी से परिवार का भरण पोषण होता था. अब घर में कोई कमाने वाला नहीं है. हम लोग कहां जाएंगे? क्या करेंगे? कुछ समझ नहीं आ रहा है. प्रशासन अगर मदद कर दे तो बड़ा सहारा मिल जाएगा. पिता की जगह बेटी को नौकरी पर रख ले तो परिवार को बड़ा सहारा होगा.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

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7 बेटियों के पिता की मौत, हर कदम निभाया बेटे का फर्ज, रुला देंगे घर के हालात!



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