बुरहानपुर जिले के दूरस्थ वनग्राम मालवीर टांडा में चिकनगुनिया जैसे लक्षण मिलने पर स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। गांव में मंगलवार को शिविर लगाकर मरीजों का इलाज किया गया।
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स्वास्थ्य टीम ने शिविर में 20 मरीजों को दवाएं और प्राथमिक उपचार दिया। चिकनगुनिया की पुष्टि के लिए 5 मरीजों के रक्त के नमूने लिए गए हैं, जिनकी रिपोर्ट दो दिन बाद खंडवा से आएगी। टीम ने घर-घर जाकर सर्वे भी किया।
वनग्राम होने से वायरस फैलने की आशंका ज्यादा
टीम के अनुसार मालवीर टांडा में 150 से अधिक परिवार रहते हैं और अधिकांश लोग महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में आते-जाते हैं। यह इलाका वनग्राम है, जहां मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल स्थितियां रहती हैं।
कई दिनों से जमे पानी का ड्रम खाली किया गया।
गांव में पांच जगह मिला एडीज मच्छर का लार्वा
सर्वे में पांच स्थानों पर एडीज मच्छर का लार्वा मिला, जिसे तुरंत नष्ट किया गया। ग्रामीणों को पूरी आस्तीन के कपड़े पहनने, मच्छरदानी लगाने और घरों में सात दिन से ज्यादा पानी जमा न होने देने की सलाह दी गई।
विभाग ने बताया कि चिकनगुनिया जानलेवा रोग नहीं है। मच्छर के काटने के दो-तीन दिन बाद तेज बुखार, जोड़ों का दर्द, थकान, लाल दाने और कभी-कभी उल्टी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। उचित इलाज और आराम से मरीज आसानी से ठीक हो सकता है। बचाव के लिए मच्छर से खुद को सुरक्षित रखना सबसे जरूरी है।