शुभम मरमट / उज्जैन. मध्य प्रदेश के उज्जैन में विश्व प्रसिद्ध श्री महाकाल के रोजाना लाखों भक्त दर्शन करने आते है. समय-समय पर मंदिर समिति श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लेती है. इसी के तहत नए साल 2026 में कई प्रकार की नई व्यवस्था नज़र आएगी. जिसमें अब पुजारी भी शामिल हो चुके हैं. मंदिर प्रबंध समिति जल्द ही ऐसी नई व्यवस्था लागू करने जा रही है, जिसके तहत अब मंदिर में पूजा-अर्चना करवाने वाले सभी पुजारी, पुरोहित और उनके प्रतिनिधि एक निर्धारित ड्रेस कोड में नजर आएंगे. यह बदलाव इसलिए किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को असली पुजारियों और बाहरी लोगों के बीच फर्क करने में आसानी हो सके.
अक्सर ऐसा देखा जाता था कि एक जैसे वस्त्र पहनकर कई अनधिकृत लोग खुद को पुजारी या पुरोहित बताकर मंदिर परिसर में प्रवेश कर जाते थे. इससे भोले-भाले श्रद्धालु भ्रमित होकर उनके संपर्क में आ जाते थे और कई बार ठगी जैसी घटनाओं का भी शिकार हो जाते थे. इसी समस्या को गंभीरता से लेते हुए महाकाल मंदिर समिति ने पुजारियों और पुरोहितों के लिए ड्रेस कोड लागू करने का निर्णय लिया है.
कितने पुजारी मंदिर में देते हैं सेवा
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि महाकालेश्वर मंदिर के 16 रजिस्टर्ड पुजारी, 22 पुरोहित और उनके लगभग 45 प्रतिनिधि है. अब सभी को समान ड्रेस पहनना अनिवार्य होगा. यह यूनिफॉर्म मंदिर समिति द्वारा निर्धारित होगी, ताकि श्रद्धालु सही व्यक्ति तक आसानी से पहुंच सकें और किसी तरह की गलतफहमी न हो.
ड्रेस के साथ अब आईडी भी आएगी नजर
ड्रेस कोड के साथ ही एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है. आईडी कार्ड व्यवस्था, अब सभी पुजारी और पुरोहित अपने गले में पहचान पत्र पहनकर ही मंदिर में सेवाएं दे सकेंगे. इस आईडी कार्ड पर पुजारी का नाम, पता, उसकी फोटो, ब्लड ग्रुप और मोबाइल नंबर जैसी जरूरी जानकारी दर्ज होगी. इससे न केवल उनकी पहचान स्पष्ट होगी, बल्कि किसी भी स्थिति में जरूरत पड़ने पर प्रशासन उन्हें तुरंत संपर्क कर सकेगा.
सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम
प्रशासक के अनुसार, यह कदम मंदिर में सुरक्षा को और मजबूत करेगा. कई बार आईडी कार्ड न होने की वजह से अनजान लोग पुजारी बनकर मंदिर परिसर में घूमते रहते थे. नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लग सकेगी. यदि किसी पुजारी या प्रतिनिधि का आईडी कार्ड खो जाता है तो इसकी सूचना तुरंत महाकाल थाना और मंदिर समिति को देना अनिवार्य होगा, ताकि कार्ड का किसी तरह का दुरुपयोग न हो पाए.
मंदिर समिति का मानना है कि इस ड्रेस कोड और आईडी कार्ड व्यवस्था से न केवल श्रद्धालुओं की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि पूरे मंदिर परिसर में अनुशासन भी मजबूत होगा. साथ ही, असली पुजारी और अनधिकृत व्यक्तियों के बीच स्पष्ट अंतर होने से भक्तों को सही मार्गदर्शन मिलेगा और वे किसी भी प्रकार की ठगी से सुरक्षित रहेंगे.