सीहोर में प्रशासन ने बुधवार को पोकलेन और जेसीबी का उपयोग कर घुमक्कड़ आदिवासी समाज के झोपड़ों को ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई से कई परिवार बेघर हो गए। आदिवासियों का आरोप है कि अधिकारियों ने उनके खेतों को भी खोदकर गहरे गड्ढे कर दिए। जब घुमक्कड़ महिलाओं ने बच्चों के साथ इस कार्रवाई का विरोध किया, तो प्रशासनिक और पुलिस दल मौके से हट गया। यह घटना चंदेरी के औद्योगिक क्षेत्र के पास हुई, जहां घुमक्कड़ आदिवासी समाज के लोग पीढ़ियों से कच्चे घरों में रहकर खेती कर जीवन यापन कर रहे थे। समाज के लोगों ने प्रशासन से गुहार लगाई थी, लेकिन उसे अनसुना कर दिया गया। आदिवासियों का आरोप है कि प्रशासन ने यह कार्रवाई किसी उद्योगपति को जमीन लीज पर देने के उद्देश्य से की है। राजू, बाबू, भगवत, गुलाब, मांगीलाल, नंदराम, चंदर, शेरसिंह, बिहारी और सीमा सहित कई घुमक्कड़ आदिवासियों ने बताया कि प्रशासन उनकी जमीन पर पोकलेन और जेसीबी लेकर आया और उनके पीने के पानी के एकमात्र स्रोत, एक ट्यूबवेल को भी तोड़ दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें वहां से भगाने के लिए झोपड़े तोड़े गए और खेतों में गड्ढे खोदे गए। समाज के सदस्यों का कहना है कि उनकी जमीन पहले ही छीन ली गई है और अब उनके घर भी तोड़े जा रहे हैं। घुमक्कड़ आदिवासी समाज ने प्रशासन और मध्य प्रदेश सरकार से रहने के लिए थोड़ी सी जमीन उपलब्ध कराने की मांग की है।
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