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Osho Birth Anniversary: ओशो की जयंती पर जबलपुर के भंवरताल में सैकड़ों अनुयायी मौलश्री वृक्ष के नीचे एकत्र हुए, केक काटा और ओशो को याद कर भावुक हुए. महाकौशल कॉलेज में भी कार्यक्रम हुआ.
Jabalpur News: ओशो की जयंती पर अनुयायियों के जज्बात ऐसे जागे कि उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े. जी हां, गुरुवार को मौका था विश्व विख्यात गुरु ओशो की जयंती का, जहां जबलपुर में न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि देशभर से ओशो के अनुयाई पहुंचे. महाकौशल कॉलेज में केक काटा गया. वहीं भंवरताल स्थित मौलश्री वृक्ष के नीचे अनुयायियों ने गले मिलकर और गाने गाकर ओशो को याद किया.
ओशो के अनुयायी प्रेम रोशन फूट-फूट कर रो पड़े. उन्होंने कहां हम दुर्भाग्यशाली हैं कि हमारे बीच ओशो नहीं हैं. सौभाग्यशाली भी हैं कि ओशो जैसी हस्ती हमारे भारत देश में रही. लेकिन, हम उन्हें पहचान न सके. जब हमारे हाथ में कुछ था, तब हमने कदर नहीं की और जब चले गए हैं, तब हम पागलों की तरह पीछे दौड़ रहे हैं. लेकिन, यह दौड़ भी हमें ओशो से कहीं न कहीं मिला देगी, जो लोग ओशो को नहीं जानते हैं, उन्हें ओशो को पढ़ना चाहिए.
भारतीय संस्कृति का विश्व में पढ़ाया पाठ
आगे बताया, आचार्य ओशो ने भारतीय संस्कृति का पाठ विश्व को पढ़ाया. आज हमें अपने आप को खुद पहचान की जरूरत है. ओशो कभी नहीं कहते थे कि मैं जो कह रहा हूं, वही सच है. पहले प्रैक्टिकल करें, फिर मेरी बातों को मानें. ओशो की हर बातें तर्कसंगत होती थीं, जो सच होती थीं. इससे ओशो कभी समझौता नहीं किया करते थे.
सैकड़ों अनुयायियों का मौलश्री वृक्ष के नीचे संगम
जबलपुर के भंवरताल गार्डन स्थित मौलश्री वृक्ष के नीचे ओशो के सैकड़ों अनुयायियों का संगम हुआ. इस दौरान अनुयायियों ने गले मिलकर एक दूसरे को शुभकामनाएं दीं. मौलश्री वृक्ष को गले लगाकर ओशो को याद किया. दरअसल भंवरताल स्थित मौलश्री वृक्ष के नीचे बैठकर ही ओशो को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी. जहां ओशो बैठकर साधना करते थे. इतना ही नहीं, जबलपुर के महाकौशल कॉलेज में आचार्य ओशो असिस्टेंट प्रोफेसर भी थे, जो दर्शनशास्त्र पढ़ाया कराते थे. जिस चेयर में बैठकर ओशो पढ़ाया करते थे, आज भी वह चेयर जबलपुर के महाकौशल कॉलेज में मौजूद है. इसे देखने देश-विदेश से ओशो के अनुयायी पहुंचते हैं.
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