भोपाल/बालाघाट: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में 40 लाख रुपए से ज्यादा के दो बड़े इनामी नक्सली दीपक और रोहित ने सरेंडर कर दिया. इनमें दीपक पर 29 लाख रुपये, जबकि रोहित पर 14 लाख यानी दोनों पर करीब 43 लाख का इनाम था. यह सरेंडर इसलिए भी खास है, क्योंकि दीपक बालाघाट का, या यूं कहिए कि मध्य प्रदेश का आखिरी रजिस्टर्ड नक्सली है.
ऐसे में इसे सरेंडर को औपचारिक तौर पर मध्य प्रदेश से नक्सलियों का खात्मा भी मान सकते हैं. हालांकि, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने देश से नक्सलियों के खात्मे के लिए 31 मार्च 2026 तक की डेडलाइन तय की है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए लगता है कि यह टारगेट समय से पहले ही हासिल हो सकता है.
खेत में लिखी गई सरेंडर की पटकथा
दीपक और रोहित के सरेंडर में पुलिस और सुरक्षा बलों के अलावा ग्रामीणों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है. ऐसे ही एक व्यक्ति हैं नयन सिंह मरकाम, जो दीपक और रोहित के सरेंडर की महत्वपूर्ण कड़ी हैं. नयन सिंह बताते हैं, मैं एक दिन खेत में काम कर रहा था. उसी दौरान दोनों नक्सली दीपक और रोहित छिपते हुए वहां सब्जी-भाजी और चावल लेने पहुंचे. तभी उनको समझाइश दइी गई.
पहले रोहित छिपकर आया…
नयन ने बताया, थोड़ी सी बातचीत के दौरान मेरे पिताजी और हमने कहा, ”सभी लोग सरेंडर हो जाओ… अब जंगल में कब तक घूमते रहोगे?” पिताजी ने उनको समझाया… इस पर रोहित तो मान गया था, लेकिन दीपक मान ही नहीं रहा था. फिर रोहित छिपकर मेरे पास पहुंचा, लेकिन वह बेहद डर रहा था. उसके बाद मैंने उसे कैंप में पहुंचा दिया.
दीपक के पास आधुनिक हथियार था
नयन ने फिर बताया, रोहित के तैयार होने के बाद दीपक भी सरेंडर के लिए तैयार हो गया. लेकिन, वह बेहद डरा था. उसके पास हथियार भी था. उसे डर था कि उसके साथ कुछ अनहोनी न हो जाए. मैंने (नयन) उससे कहा, ”हम आपको सरेंडर करवा देते हैं. आपको कोई दिक्कत नहीं होगी, न मारपीट होगी… आपको कुछ नहीं होगा.”
बालाघाट एसपी ने पूछा- झूठ तो नहीं बोल रहे हो?
नयन सिंह ने फिर बताया, मैंने स्थानीय निवासी राजकुमार धुर्वे को इसकी जानकारी दी और उनसे एसपी साहब का कॉन्टैक्ट नंबर लिया. इसके बाद मेरी जब एसपी साहब से बात हुई, तो उन्होंने पूछा- बेटा, तुम झूठी खबर तो नहीं दे रहे हो? इस पर मैंने कहा- नहीं सर, झूठी खबर नहीं दे रहा हूं, मैं सही खबर दे रहा हूं. इसके बाद मैंने इनका सरेंडर करवा दिया.