कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालु मौजूद रहे।
जिले के दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र बावनगजा में शनिवार को भक्तामर विधान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्र संत गणाचार्य विराग सागर जी महाराज के शिष्य उच्चारणाचार्य विनम्र सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में पूरा किया गया।
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आचार्य संघ ने पहाड़ पर स्थित मंदिरों की वंदना की और भगवान आदिनाथ के चरणों में विशेष ध्यान और साधना की। मुनिसंघ ने चुलगिरी के मंदिरों के भी दर्शन किए, जहां से इंद्रजीत, कुंभकर्ण और साढ़े तीन करोड़ मुनिराज ने मोक्ष प्राप्त किया था। इसके बाद तलहटी के मंदिरों के भी दर्शन किए गए।
शनिवार को आचार्य संघ की उपस्थिति में भगवान का अभिषेक, शांतिधारा और नित्य नियम की पूजा की गई। इसके बाद आचार्य श्री का भी पूजन किया गया और उनकी आहार चर्या की गई। सामयिक के बाद भक्तामर विधान का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
आदिनाथ के चित्र का अनावरण कर दीप प्रज्वलन किया गया
भगवान आदिनाथ की प्रतिमा के चरणों का अभिषेक किया जाएगा
विधान के दौरान श्रावकों ने भगवान आदिनाथ के चित्र का अनावरण किया और दीप जलाया। इस मौके पर आचार्य श्री को शास्त्र भेंट किए गए और पाद प्रक्षालन भी किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालु मौजूद रहे। शाम को प्रतिक्रमण किया गया, गुरुभक्ति हुई और भगवान-आचार्य श्री की आरती की गई।
इससे पहले ट्रस्ट अध्यक्ष विनोद दोशी और ट्रस्ट के सदस्यों ने आचार्य संघ का स्वागत किया। उन्होंने आरती उतारी, पाद प्रक्षालन किया और श्रीफल भेंट किया।
ट्रस्ट अध्यक्ष विनोद दोशी ने बताया कि 14 तारीख रविवार सुबह हजारों श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति में 84 फीट ऊंची भगवान आदिनाथ की प्रतिमा के चरणों का अभिषेक किया जाएगा। इसके साथ ही 1008 मंत्रों से शांतिधारा भी होगी।
दोपहर में आहार के बाद आचार्य श्री का 16वां दीक्षा दिवस मनाया जाएगा और उनके प्रवचन होंगे। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बाहर से श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया है।