एमवाय अस्पताल में आयुष्मान इंसेंटिव राशि वितरण घोटाले में तत्कालीन डीन डॉ. संजय दीक्षित और नोडल अधिकारी डॉ. यामिनी गुप्ता सवालों के घेरे में हैं। दोनों ने नियमों का पालन नहीं किया, जिससे योजना की राशि अपात्र लोगों तक पहुंच गई।
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जांच रिपोर्ट के मुताबिक आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत इंसेंटिव राशि केवल उन्हीं चिकित्सकों को दी जानी थी, जो निजी प्रैक्टिस नहीं करते थे। बावजूद एमवाय अस्पताल में नियमों को नजरअंदाज कर निजी अस्पतालों में प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों को भी इंसेंटिव दे दिया गया।
इंसेंटिव वितरण आपसी सांठगांठ से हुआ, जिससे सरकारी राशि का गलत उपयोग सामने आया। बड़ी लापरवाही यह भी उजागर हुई कि एमवाय अस्पताल के अधीक्षक स्तर पर इंसेंटिव वितरण पत्रक का नियमानुसार सत्यापन नहीं कराया गया। इससे पूरे वितरण तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं। मामले में तत्कालीन संभागायुक्त द्वारा कराई गई जांच के आधार पर फार्मासिस्ट रामेश्वर चंदेल को सस्पेंड किया गया है।
ऐसे हुई गड़बड़ी
- गड़बड़ी 24 नवंबर 2018 और 23 जनवरी 2019 को जारी आदेशों से जुड़ी है। इन आदेशों के अनुसार 8 जनवरी 2021 तक केवल पात्र चिकित्सकों को ही इंसेंटिव राशि दी जानी थी। जांच में पाया गया कि इस अवधि में कई ऐसे डॉक्टरों को भुगतान किया गया, जो नियमों के अनुसार इसके हकदार नहीं थे।
- फरवरी 2024 में संभागायुक्त ने जांच के बाद अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर डीन सहित जिम्मेदार अधिकारियों से राशि वसूलने और उनके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की थी। बावजूद लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बाद में दोबारा मामले की समीक्षा के लिए वर्तमान डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया को पत्र भेजा गया, जिसमें पूछा गया कि जांच रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई की गई। इसके बाद फार्मासिस्ट को सस्पेंड करने का आदेश जारी हुआ।
- जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2021 तक नोडल अधिकारी को इंसेंटिव राशि नहीं दी जानी थी, बावजूद डॉ. यामिनी गुप्ता को भुगतान किया गया। यह राशि वसूली योग्य मानी गई है। समान केडर के अधिकारियों को बराबर इंसेंटिव दिया जाना था, लेकिन डॉ. गुप्ता को 2 प्रतिशत राशि दी गई, जबकि नियम के अनुसार एक प्रतिशत से अधिक का भुगतान गलत पाया गया।
विवेचना के बाद दोषमुक्त किया है
राशि वितरण को लेकर विभागीय जांच जारी है आयुष्मान योजना की राशि वितरण को लेकर जांच के बाद कार्रवाई की गई है। फार्मासिस्ट को सस्पेंड किया है और मामले में विभागीय जांच जारी है।– डॉ. अरविंद घनघोरिया, डीन, एमजीएम मेडिकल कॉलेज
दोबारा जांच हो रही है, रिपोर्ट आ जाएगी उक्त मामले में पहले भी जांच हो चुकी है। पुनः शासन इस मामले में जांच कर रहा है। जो रिपोर्ट होगी, सामने आ जाएगी। – डॉ. संजय दीक्षित, पूर्व डीन, एमजीएम मेडिकल कॉलेज
विवेचना के बाद दोषमुक्त किया है उक्त मामले में शासन स्तर पर पहले ही विवेचना की जा चुकी है और दोष मुक्त किया गया है। और इस मामले में कुछ नहीं कहना। – डॉ. यामिनी गुप्ता