विधानसभा परिसर का निरीक्षण करते विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर।
विधानसभा के बुधवार को होने वाले विशेष अधिवेशन की तैयारियों का जायजा सोमवार को विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने लिया। इस दौरान उन्होंने प्रमुख सचिव अरविन्द शर्मा और विधानसभा सचिवालय के अफसरों को सुरक्षा प्रबंधों और बैठक व्यवस्था को लेकर निर्देश द
.
विधानसभा सचिवालय ने बैठक में शामिल होने वाले विधायकों को सत्र की सूचना भेज दी है। इस बैठक के लिए विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने एजेंडा भी तय कर दिया है। कांग्रेस, बीजेपी और अन्य दलों के नेता इस बैठक में मध्यप्रदेश के विकास को लेकर अपने विचार रखेंगे। बैठक में मध्यप्रदेश को विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य बनाने पर चर्चा होगी जिसमें कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही दलों से दस-दस विधायकों को बोलने का मौका दिया जाएगा।
यह है विधानसभा का इतिहास
26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के बाद देश में सन् 1952 में पहले आम चुनाव हुए, जिसके कारण संसद एवं विधान मंडल कार्यशील हुए। प्रशासन की दृष्टि से इन्हें श्रेणियों में विभाजित किया गया था। सन् 1956 में राज्यों के पुनर्गठन के चलते 1 नवंबर 1956 को नया राज्य मध्यप्रदेश बना। इसके घटक राज्य मध्यप्रदेश, मध्यभारत, विंध्य प्रदेश एवं भोपाल थे जिनकी अपनी विधान सभाएं थीं। मध्यप्रदेश के गठन के बाद यहां पहले से काम कर रहीं मध्यप्रदेश विधानसभा, मध्यभारत विधानसभा, विंध्य प्रदेश विधानसभा और भोपाल विधानसभा को मर्ज कर दिया गया। इसके बाद 1 नवंबर 1956 को पहली मध्यप्रदेश विधानसभा अस्तित्व में आई। इस विधानसभा का पहला अधिवेशन 17 दिसंबर 1956 को और अंतिम अधिवशन 17 जनवरी 1957 को हुआ।