हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने DHL इन्फ्राबुल इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के संचालकों के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगा दी है। ईओडब्ल्यू ने बंधक प्लाट बेचने के मामले में केस दर्ज किया था। शिकायत की जांच के बाद यह केस दर्ज किया था।
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मामले में तीन आरोपी डायरेक्टर संतोष सिंह, संजीव जायसवाल और अनिरुद्ध देव है। अनिरुद्ध देव की ओर से अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल और जयेश गुरनानी ने पैरवी की।
हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि कंपनी के डायरेक्टर में एक अधिवक्ता है जो प्रोफेशनल डायरेक्टर थे। कंपनी में लॉ के अनुसार प्रोफेशनल डायरेक्टर दैनिक प्रबंधन में शामिल नहीं होंगे।
न ही इसके लिए जिम्मेदर होंगे। ऐसे में अगली सुनवाई तक दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई जाती है।
बंधक संपत्ति को गलत तरीके से विक्रय करने का मामला आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ मुख्यालय भोपाल में पंजीबद्ध शिकायत क्रमांक 266/2025 के सत्यापन पर यह कार्रवाई हुई है।
जिसमें DHL इन्फ्राबुल्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के संचालकों संतोष कुमार सिंह, संजीव और अनिरुद्ध के खिलाफ बंधक संपत्ति को गलत तरीके से विक्रय करने का मामला पाया गया था।
इस पर EOW मुख्यालय भोपाल द्वारा अपराध धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी में अपराध पंजीबद्ध किया गया। ईओडब्ल्यू एसपी रामेशवर यादव द्वारा मामले की गहन जांच कराई जा रही है।
इतने प्लाट बेचे गए ईओडब्ल्यू केस में यह था कि आरोपी कंपनी DHL इन्फ्राबुल्स इंटरनेशनल प्रालि के संचालक मंडल ने आईकॉनस लैंडमार्क-01 और आईकॉनस लैंडमार्क-02 के 249 भूखंड बंधक रखे थे। ये भूखंड कॉलोनी सेल इंदौर में विकास के बदले रखे थे। शासन में बंधक रखे गए भूखंडों का स्वामित्व कॉलोनी सेल/शासन का है।
कंपनी द्वारा बंधक भूखंड को मुक्त नहीं किया था। आरोपियों ने शासन के स्वामित्व के 15 बंधक भूखंड बेचे। ये भूखंड बिना अपर कलेक्टर, कॉलोनी सेल से प्रमाण पत्र प्राप्त किए बेचे गए। विक्रय अन्य पक्षकारों को रजिस्टर्ड किया गया।